Yamunanagar News: हरियाणा में गन्ने के राज्य परामर्शित मूल्य (SAP) में केवल 15 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सरकार की ओर से इस मामूली इजाफे को किसानों के लिए ‘दिवाली का तोहफा’ करार दिए जाने से अन्नदाताओं का धैर्य जवाब दे गया है। इसी के विरोध में शुक्रवार को यमुनानगर जिले के रादौर में भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी गुट) के नेतृत्व में सैकड़ों किसान सड़कों पर उतर आए और सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया।
रादौर की अनाज मंडी में सुबह से ही किसानों का जुटना शुरू हो गया था। हाथों में यूनियन के झंडे और बैनर थामे किसानों ने रोष मार्च निकाला और नारेबाजी करते हुए सीधे कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा के आवास के समीप जा पहुंचे। भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बीच किसानों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी तथा कृषि मंत्री का प्रतीकात्मक पुतला फूंककर अपने कड़े तेवर दिखाए।
‘चीनी 70 रुपये किलो, और किसानों को थमा रहे हैं 15 रुपये’
प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष संजू गुंदियाना ने सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि किसान पिछले काफी समय से गन्ने का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाकर 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार ने किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कते हुए केवल 15 रुपये का इजाफा किया है।
संजू गुंदियाना ने तीखा सवाल पूछते हुए कहा कि जब खुले बाजार में आम उपभोक्ता के लिए चीनी के दाम 70 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच चुके हैं, तो क्या गन्ना उगाने वाले किसान को उसकी मेहनत का वाजिब हक नहीं मिलना चाहिए? खेती में इस्तेमाल होने वाले डीजल, खाद, कीटनाशक और मजदूरी के दाम आसमान छू रहे हैं, ऐसे में महज 15 रुपये की बढ़ोतरी किसानों के साथ एक भद्दा मजाक के अलावा कुछ नहीं है।
शुगर मिलें बंद करने और भाजपा नेताओं के विरोध की चेतावनी
आक्रोशित किसानों ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि सरकार ने जल्द ही गन्ने के दामों में सम्मानजनक संशोधन नहीं किया, तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा। इसके लिए जल्द ही एक बड़ी प्रदेश स्तरीय किसान महापंचायत बुलाई जाएगी, जिसमें राज्यव्यापी रूपरेखा तैयार होगी।
किसान नेताओं ने दोटूक कहा कि आगामी रणनीति के तहत पूरे प्रदेश में शुगर मिलों के कामकाज को ठप करने, खेतों में खड़ी गन्ने की फसल को उखाड़ने और भाजपा के मंत्रियों तथा स्थानीय नेताओं के गांवों में प्रवेश का पुरजोर विरोध करने जैसे कड़े कदम उठाए जा सकते हैं। किसानों ने साफ कर दिया है कि वे अब सरकार के इस छलावे को चुपचाप सहन नहीं करेंगे।
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