Yamunanagar News: 28 अगस्त को भद्रा मुक्त रहेगा रक्षाबंधन, जानिए राखी बांधने का सबसे सटीक शुभ मुहूर्त

28 अगस्त को भद्रा मुक्त रहेगा रक्षाबंधन, जानिए राखी बांधने का सबसे सटीक शुभ मुहूर्त
Yamunanagar News: संजीव चौहान (यमुनानगर)। भाई-बहन के अटूट प्रेम, अटूट विश्वास और सुरक्षा के वचन का प्रतीक रक्षाबंधन का त्योहार इस वर्ष 28 अगस्त को देशभर में पारंपरिक श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। ज्योतिष विद्वानों के अनुसार, इस बार बहनों को अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधने के लिए समय को लेकर असमंजस में पड़ने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि इस पूरे दिन भद्रा का साया नहीं रहेगा। इसके साथ ही, इस बार सुकर्मा योग और शतभिषा नक्षत्र का दुर्लभ व अत्यंत शुभ संयोग भी बन रहा है, जो इस पर्व के आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व को और बढ़ा देता है।
अमादलपुर स्थित प्राचीन सूरजकुंड मंदिर के आचार्य त्रिलोक महाराज ने इस विशेष संयोग की जानकारी देते हुए बताया कि ज्योतिष शास्त्र में सुकर्मा योग को किसी भी शुभ और मांगलिक कार्य के निष्पादन के लिए बेहद फलदायी माना गया है। इस योग में किए गए कार्यों में सफलता और शुभता प्राप्त होती है। वहीं, शतभिषा नक्षत्र की उपस्थिति बहनों द्वारा भाइयों की दीर्घायु और निरोगी जीवन की कामना के लिए किए जाने वाले अनुष्ठानों के प्रभाव को कई गुना बढ़ा देती है।
प्रातः 5:57 से 9:48 बजे तक रहेगा सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त
आचार्य त्रिलोक महाराज के अनुसार, 28 अगस्त को पूर्णिमा तिथि की उपस्थिति के साथ ही रक्षा सूत्र बांधने का सबसे उत्तम और फलदायी मुहूर्त सुबह 5:57 बजे से शुरू होकर 9:48 बजे तक रहेगा। यह समय विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने और राखी बांधने के लिए सर्वथा उपयुक्त है।
उन्होंने बताया कि इस दिन सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक राहुकाल रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राहुकाल की अवधि में कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य करने से बचना चाहिए। इसलिए बहनों को सलाह दी जाती है कि वे सुबह के शुभ मुहूर्त में ही रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा पूरी कर लें।
पूजा की सही विधि और रक्षाबंधन का महत्व
त्योहार की धार्मिक विधि पर प्रकाश डालते हुए आचार्य ने बताया कि बहनों को प्रातःकाल स्नान-ध्यान से निवृत्त होकर पूजा की थाली सजानी चाहिए। थाली में रोली, अक्षत (साबुत चावल), दीपक, मिठाई और रक्षा सूत्र (राखी) रखकर सबसे पहले अपने इष्टदेव या भगवान का स्मरण करना चाहिए। इसके पश्चात भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके बैठाएं, उनके माथे पर रोली-अक्षत का तिलक लगाएं, आरती उतारें और फिर दाहिनी कलाई पर राखी बांधें। राखी बांधने के बाद भाई का मुंह मीठा कराकर उनके सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना करें।
आचार्य त्रिलोक महाराज ने जोर देकर कहा कि रक्षाबंधन केवल एक सांस्कृतिक या पारंपरिक रस्म भर नहीं है, बल्कि यह परिवार में आपसी स्नेह, सम्मान और एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने का माध्यम है। उन्होंने आज की युवा पीढ़ी से अपील की कि वे अपने पर्वों के पीछे छिपे सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों को समझें और सनातन परंपराओं से निरंतर जुड़े रहें।
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