August 23, 2026

Yamuna Cleaning: दिल्ली में यमुना को बचाने के लिए मोहल्ला स्तर पर लगेंगे DSTP, विशेषज्ञों ने सरकार को दिए बड़े सुझाव

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Yamuna Cleaning: दिल्ली में यमुना को बचाने के लिए मोहल्ला स्तर पर लगेंगे DSTP, विशेषज्ञों ने सरकार को दिए बड़े सुझाव

दिल्ली में यमुना को बचाने के लिए मोहल्ला स्तर पर लगेंगे DSTP

Yamuna Cleaning: देश की राजधानी दिल्ली में यमुना नदी को अपने अस्तित्व की सबसे कठिन लड़ाई लड़नी पड़ रही है। दिल्ली के सीमावर्ती इलाकों से लेकर वजीराबाद और ओखला तक, यमुना में गिरने वाले दर्जनों गंदे नाले इसके जल को जहरीला बना रहे हैं। आलम यह है कि राजधानी में यमुना का लगभग 22 किलोमीटर का हिस्सा सबसे खतरनाक स्तर तक प्रदूषित हो चुका है। इस गंभीर समस्या के स्थायी समाधान तलाशने के लिए दिल्ली के मंडपम में ‘नदी पुनर्जीवन सम्मेलन’ का आयोजन किया गया, जिसमें देशभर के पर्यावरण विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों ने मंथन किया।

सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए दिल्ली सरकार के मुख्य प्रवक्ता अभय वर्मा ने यमुना को स्वच्छ बनाने के लिए सरकार द्वारा चलाए जा रहे अभियानों का ब्यौरा दिया। उन्होंने आश्वस्त किया कि इस तरह के मंचों से आने वाले व्यावहारिक और तकनीकी सुझावों को सरकार की सफाई रणनीति में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा।

मोहल्ला स्तर पर पानी का उपचार और डेटा की सटीकता बेहद जरूरी

सम्मेलन में पहुंचे विशेषज्ञों ने इस बात पर सबसे ज्यादा जोर दिया कि सीवेज को नदी तक पहुंचने से पहले ही रोका जाना चाहिए। ‘यमुना बचाओ अभियान’ के संयोजक डॉ. शिव सिंह रावत ने तर्क दिया कि जिस जगह सीवेज उत्पन्न होता है, वहीं उसका उपचार (ट्रीटमेंट) होना चाहिए। इसके लिए बड़े एसटीपी (STP) पर निर्भर रहने के बजाय मोहल्ला स्तर पर ‘विकेंद्रीकृत सीवेज उपचार संयंत्र’ (DSTP) स्थापित किए जाने चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि उपचारित पानी का उपयोग बागवानी, सफाई और निर्माण कार्यों में किया जाए ताकि नदी के मुख्य प्रवाह पर दबाव कम हो सके।

वहीं ‘इंडिया वाटर क्वालिटी एसोसिएशन’ के अध्यक्ष डॉ. संजय शर्मा ने कहा कि प्रदूषण की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए सीवेज और जल गुणवत्ता के आंकड़ों का सटीक होना अनिवार्य है। पानी के नमूने लेने से लेकर लैब टेस्टिंग तक तय मानकों का पालन होना चाहिए और प्रयोगशालाओं में आधुनिक उपकरणों के साथ प्रशिक्षित कर्मचारियों की तैनाती की जानी चाहिए।

एआई (AI) और प्राकृतिक क्षमता से मिलेगी यमुना को नई जिंदगी

विशेषज्ञों का मानना है कि नदियों में खुद को साफ करने की एक प्राकृतिक क्षमता होती है, बशर्ते उसमें नई गंदगी डालना बंद कर दिया जाए। ‘अर्थ वारियर्स’ के पंकज कुमार ने कहा कि अगर हम नालों के कचरे को नदी में जाने से रोक दें, तो यमुना बहुत जल्द अपने पुराने स्वरूप में लौट सकती है।

तकनीक का उदाहरण देते हुए आईओटी (IoT) विशेषज्ञ डॉ. शाह साउद ने सुझाव दिया कि यमुना में प्रदूषण के रियल-टाइम डेटा विश्लेषण और मॉनिटरिंग के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल होना चाहिए। सम्मेलन में हरियाणा जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के चीफ केमिस्ट अमित सिंह, सत्यम कौल और कृति हेगड़े समेत कई गणमान्य विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे। इस सम्मेलन से निकले सभी ठोस सुझावों की एक विस्तृत रिपोर्ट जल्द ही दिल्ली सरकार को सौंपी जाएगी।

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