Yamunanagar python rescue: हरियाणा के यमुनानगर में वन्यजीवों के रेस्क्यू का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने देखने वालों के रोंगटे खड़े कर दिए। व्यासपुर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले रसूलपुर गांव में खेतों के बीच बने एक बंद कमरे के रोशनदान में 11 फीट लंबा और लगभग 45 किलो वजनी अजगर करीब 10 दिनों तक फंसा रहा। इस दौरान अजगर ने खुद को आजाद कराने की बहुत कोशिश की, लेकिन उसकी यह जिद उसके लिए भारी पड़ गई। रोशनदान में लगी लोहे की ग्रिल उसके पेट में करीब तीन-तीन इंच तक अंदर धंस गई, जिससे वह गंभीर रूप से कमजोर हो चुका था।
मामले का खुलासा तब हुआ जब खेत के मालिक कई दिनों बाद अपने खेतों की सुध लेने पहुंचे। खेत मालिक गुरदीप, जो खुद हरियाणा पुलिस में सेवारत हैं, ने जब कमरे के दरवाजे के ऊपर बने रोशनदान में इस विशालकाय अजगर को उलझा हुआ देखा, तो उनके होश उड़ गए। अजगर इस बुरी तरह फंसा हुआ था कि वह हिलने-डुलने तक की स्थिति में नहीं था। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए गुरदीप ने बिना देर किए तुरंत इसकी सूचना वाइल्ड लाइफ (वन्यजीव) विभाग को दी।
छेनी-हथौड़े और ब्लेड की मदद से काटी गई ग्रिल
सूचना मिलते ही वन्यजीव विभाग की रेस्क्यू टीम तुरंत मौके पर पहुँची। रेस्क्यू अभियान की कमान संभाल रहे विभाग के कर्मचारी मोहित ने बताया कि स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण थी। अजगर कमरे के रोशनदान की लोहे की ग्रिल के बीचों-बीच बुरी तरह अटका हुआ था। उसे बिना और अधिक चोट पहुँचाए बाहर निकालना किसी टेढ़ी खीर से कम नहीं था। टीम ने सबसे पहले सावधानी बरतते हुए छेनी और हथौड़े की मदद से आसपास के रोशनदान को तोड़ा और ग्रिल को बाहर निकाला।
जांच के दौरान टीम ने देखा कि लोहे की ग्रिल के दो नुकीले हिस्से अजगर के शरीर और पेट के अंदर करीब तीन-तीन इंच तक धंसे हुए थे। लगभग 10 दिनों तक बिना भोजन-पानी और दर्द में फंसे रहने के कारण अजगर बेहद सुस्त और लाचार हो चुका था। ऐसे में टीम ने अत्यंत सावधानी का परिचय देते हुए ब्लेड की मदद से धीरे-धीरे उस लोहे की ग्रिल को काटना शुरू किया। ग्रिल शरीर में धंसी होने के कारण एक-एक इंच काटना बहुत जोखिम भरा था, लेकिन आखिरकार 5 घंटे से अधिक चले लंबे रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद अजगर को ग्रिल से सुरक्षित आजाद करा लिया गया।
उपचार के बाद कलेसर के जंगल में छोड़ा गया
रोशनदान के बंधन से मुक्त होने के बाद वन्यजीव विभाग की टीम ने घायल अजगर का तुरंत प्राथमिक उपचार किया, ताकि उसके घावों पर मरहम लगाया जा सके और संक्रमण का खतरा टल सके। इतने दिनों तक भूखे-प्यासे रहने और गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद अजगर की जान बचाए जाने से विभाग ने राहत की सांस ली।
प्राथमिक उपचार और स्वास्थ्य लाभ देने के बाद, अजगर को उसके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित वापस लौटने के उद्देश्य से कलेसर के घने जंगलों में ले जाकर छोड़ दिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते विभाग को सूचना न मिलती और रेस्क्यू न किया जाता, तो इस विशाल अजगर की जान बचाना नामुमकिन हो जाता।
यह भी पढ़ें– हरियाणा में फिर बदला मौसम का मिजाज, कुरुक्षेत्र और कैथल में तेज हवाओं का अलर्ट

