Kamika Ekadashi: कामिका एकादशी 9 अगस्त को, द्विपुष्कर योग में पूजा का मिलेगा दोगुना फल, जानिए पावन व्रत कथा
कामिका एकादशी 9 अगस्त को, द्विपुष्कर योग में पूजा का मिलेगा दोगुना फल
Kamika Ekadashi: सनातन परंपरा में सावन महीने का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। सावन के महीने में आने वाली एकादशी तिथियों को बेहद फलदायी और पवित्र माना जाता है। पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की ‘कामिका एकादशी’ का व्रत इस बार 9 अगस्त को रखा जाएगा। इस वर्ष कामिका एकादशी पर अत्यंत शुभ ‘द्विपुष्कर योग’ का निर्माण हो रहा है। मान्यता है कि द्विपुष्कर योग में किए गए व्रत, पूजा-पाठ, जप-तप और दान-पुण्य का साधक को दोगुना फल प्राप्त होता है।
वाजपेय यज्ञ के समान मिलता है पुण्य
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जो भी श्रद्धालु कामिका एकादशी का विधि-विधान से व्रत रखते हैं और भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा करते हैं, उनके जन्मों-जन्मों के पाप कट जाते हैं। श्रीहरि की कृपा से व्यक्ति को मृत्यु के बाद कुयोनि में नहीं जाना पड़ता और मोक्ष की प्राप्ति होती है। धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि कामिका एकादशी की कथा सुनने मात्र से ही श्रद्धालु को ‘वाजपेय यज्ञ’ के समान अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
कामिका एकादशी की पौराणिक व्रत कथा
कामिका एकादशी के महत्व को लेकर शास्त्रों में एक प्रसिद्ध कथा का वर्णन मिलता है। एक बार धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से सावन कृष्ण एकादशी के महत्व और उसकी कथा के बारे में जानने की इच्छा व्यक्त की। तब भगवान श्रीकृष्ण ने बताया कि यही प्रश्न एक बार नारद मुनि ने सृष्टि के रचयिता ब्रह्माजी से पूछा था।
कथा के अनुसार, प्राचीन काल में एक गांव में एक बेहद क्रोधी स्वभाव का ठाकुर रहता था। बात-बात पर आपा खो देना उसकी आदत थी। एक दिन किसी काम से बाहर निकलते समय रास्ते में उसका एक ब्राह्मण से किसी बात पर विवाद हो गया। बहस इतनी बढ़ गई कि गुस्से में आकर ठाकुर ने उस ब्राह्मण की हत्या कर दी।
जब ठाकुर का गुस्सा शांत हुआ तो उसे अपने किए पर भारी पश्चाताप हुआ। वह प्रायश्चित के तौर पर ब्राह्मण का अंतिम संस्कार करना चाहता था, लेकिन गांव के अन्य विद्वानों ने उसे रोक दिया और उस पर ‘ब्रह्महत्या’ का भारी दोष लग गया। ब्रह्महत्या के पाप और आत्मग्लानि के बोझ से ठाकुर दिन-रात तड़पने लगा।
ऋषि की सलाह पर रखा व्रत, मिली पापों से मुक्ति
मन के भारी बोझ को हल्का करने के लिए उसने एक सिद्ध ऋषि की शरण ली और उनसे ब्रह्महत्या के महापाप से मुक्ति का मार्ग पूछा। तब ऋषि मुनि ने उसे सावन माह के कृष्ण पक्ष की ‘कामिका एकादशी’ का पूरे विधि-विधान से व्रत करने का परामर्श दिया।
ऋषि ने बताया कि भगवान विष्णु ही समस्त पापों का संहार करने वाले हैं, इसलिए कामिका एकादशी का व्रत रखकर सुदर्शन चक्रधारी श्रीहरि की आराधना करो। ठाकुर ने ऋषि की आज्ञा का पालन करते हुए पूरी निष्ठा के साथ कामिका एकादशी का व्रत रखा। उसकी सच्ची भक्ति और प्रायश्चित से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उसे ब्रह्महत्या के दोष से मुक्त कर दिया और उसके समस्त पापों का नाश कर दिया।
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