August 10, 2026

Rohtak Farmers Protest: रोहतक में निजीकरण के खिलाफ ‘जेल भरो आंदोलन’ में उमड़ा जनसैलाब, ‘कम पड़ गईं पुलिस की बसें’

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Rohtak Farmers Protest: रोहतक में निजीकरण के खिलाफ 'जेल भरो आंदोलन' में उमड़ा जनसैलाब, 'कम पड़ गईं पुलिस की बसें'

रोहतक में निजीकरण के खिलाफ 'जेल भरो आंदोलन' में उमड़ा जनसैलाब, 'कम पड़ गईं पुलिस की बसें'

Rohtak Farmers Protest: रोहतक में ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की वर्षगांठ पर किसान और मजदूर संगठनों ने राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों से जुड़े सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने डीसी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते हुए सामूहिक रूप से गिरफ्तारियां दीं। आलम यह रहा कि जिला प्रशासन द्वारा बुलाई गई बसें प्रदर्शनकारियों की संख्या के आगे छोटी पड़ गईं और अंततः 10 बसों में भरकर आंदोलनकारियों को पुलिस लाइन ले जाना पड़ा, जहां बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।

‘निजीकरण और किसान-विरोधी नीतियों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई’

प्रदर्शन के दौरान जनवादी महिला समिति की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जगमति सांगवान ने केंद्र और राज्य सरकार पर तीखे जुबानी हमले बोले। उन्होंने कहा कि आज ही के दिन देश में अंग्रेजों के खिलाफ ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ शुरू हुआ था, और आज देश का हर वर्ग अपनी ही सरकार के खिलाफ अधिकारों की लड़ाई लड़ने पर मजबूर है।

श्रम कानूनों में मजदूर-विरोधी बदलावों, महिला आरक्षण बिल को परिसीमन की आड़ में अटकाने और बिजली विभाग के निजीकरण को लेकर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने दोटूक कहा कि यदि पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं करती, तो वे डीसी ऑफिस के बाहर ही अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ जाते।

‘कांवड़ लाने वाले कर्मचारियों को रोका जा रहा, धर्म के नाम पर दोहरा रवैया’

भारतीय किसान यूनियन (BKU) की नेता मोनिका नैन ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी किसान या कर्मचारी अपनी न्यायसंगत मांगों को लेकर किसी बैठक का आह्वान करते हैं, तो पुलिस उनके नेताओं को जबरन हिरासत में ले लेती है। मोनिका नैन ने कहा, “एक तरफ सरकार आम कांवड़ियों पर फूल बरसाने का दिखावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ कांवड़ लाने वाले संविदा कर्मचारियों को रास्ते में रोककर हिरासत में लिया जा रहा है। यह कर्मचारियों की आस्था और संघर्ष को कुचलने का दोहरा रवैया है।”

प्रशासन के छूटे पसीने, कम पड़ गई बसें

डीसी कार्यालय के बाहर जेल भरो आंदोलन के दौरान माहौल उस समय और गर्मा गया जब कार्यकर्ताओं की भीड़ के सामने प्रशासन की व्यवस्थाएं बौनी साबित हुईं। शुरुआत में पुलिस प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को ले जाने के लिए महज तीन बसों का प्रबंध किया था। हालांकि, गिरफ्तारी देने वालों की भारी संख्या को देखते हुए पुलिस को तुरंत अतिरिक्त गाड़ियां बुलानी पड़ीं।

आखिरकार 10 बसों में ठसाठस भरकर प्रदर्शनकारियों को पुलिस लाइन ले जाया गया। किसान और कर्मचारी नेताओं ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक निजीकरण और दमनकारी नीतियों को वापस नहीं लिया जाता, उनका यह संघर्ष जारी रहेगा।

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