August 15, 2026

Liver Transplant: 6 से 8 हफ्तों में दोबारा उग जाता है डोनर का लिवर, जानिए इस अंग का अद्भुत विज्ञान

0
Liver Transplant: 6 से 8 हफ्तों में दोबारा उग जाता है डोनर का लिवर, जानिए इस अंग का अद्भुत विज्ञान

6 से 8 हफ्तों में दोबारा उग जाता है डोनर का लिवर, जानिए इस अंग का अद्भुत विज्ञान

Liver Transplant: हमारे शरीर का सबसे व्यस्त अंग लिवर न केवल भोजन को पचाने और टॉक्सिन्स को बाहर निकालने का काम करता है, बल्कि यह शरीर में 500 से ज्यादा जैविक क्रियाओं को भी संचालित करता है। हालांकि, आज के दौर की असंतुलित दिनचर्या, गलत खान-पान और शराब के अत्यधिक सेवन से लिवर डैमेज का खतरा काफी बढ़ गया है।

चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, जब लिवर अपनी आत्म-मरम्मत की क्षमता खो देता है, तो ‘लिवर ट्रांसप्लांट’ जीवन बचाने की अंतिम उम्मीद बनता है। बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में एचपीबी सर्जरी एवं लिवर ट्रांसप्लांट के चेयरमैन डॉ. अभिदीप चौधरी बताते हैं कि लिवर में कोशिकाओं के तेजी से विभाजित होने की अनूठी क्षमता होती है।

‘लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट’ प्रक्रिया के दौरान डॉक्टर स्वस्थ डोनर के लिवर का करीब 40 से 60 फीसदी हिस्सा निकालकर मरीज में प्रत्यारोपित करते हैं। सर्जरी के तुरंत बाद ही डोनर के शरीर में बची हुई कोशिकाएं तेजी से विकसित होने लगती हैं और मात्र 6 से 8 हफ्तों के भीतर डोनर का लिवर अपने मूल आकार का 80 से 90 प्रतिशत तक वापस बढ़ जाता है।

कब और क्यों पड़ती है लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत?

मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, पटपड़गंज में एचपीबी सर्जरी व लिवर ट्रांसप्लांट के वरिष्ठ निदेशक डॉ. अजिताभ श्रीवास्तव के मुताबिक, ट्रांसप्लांट का फैसला अंतिम चरण में ही लिया जाता है।

जब मरीज क्रोनिक लिवर सिरोसिस, अचानक लिवर फेलियर (Acute Liver Failure), कुछ विशेष प्रकार के लिवर कैंसर या जन्मजात आनुवंशिक बीमारियों की चपेट में आ जाता है और दवाएं असर करना बंद कर देती हैं, तब सर्जरी ही एकमात्र रास्ता बचती है।

कैसे होती है ट्रांसप्लांट की पूरी प्रक्रिया?

डोनर का चयन व कड़ा परीक्षण: लिवर ट्रांसप्लांट के लिए किसी मृत व्यक्ति (कैडेवर डोनर) या फिर परिवार के ही किसी जीवित स्वस्थ परिजन का लिवर लिया जा सकता है। डोनर की मेडिकल हिस्ट्री, ब्लड ग्रुप, शारीरिक बनावट और मानसिक स्थिति की बेहद कड़ाई से जांच की जाती है।

सर्जरी पूर्व तैयारियां: ऑपरेशन थिएटर में ले जाने से पहले मरीज के शरीर में पानी जमा होने (फ्लूइड रिटेंशन), इंफेक्शन, कुपोषण और किडनी के फंक्शन को दवाओं के जरिए स्थिर किया जाता है।

जटिल सर्जरी का चरण: इस सर्जरी में मरीज के पूरी तरह से डैमेज हो चुके लिवर को बाहर निकाला जाता है और उसकी जगह डोनर के स्वस्थ लिवर का हिस्सा लगा दिया जाता है। इसके बाद नई धमनियों, नसों और पित्त की नलियों (Bile Duct) को जोड़कर रक्त संचार शुरू किया जाता है।

सर्जरी के बाद ICU में देखभाल: ट्रांसप्लांट के शुरुआती दिनों में मरीज को आईसीयू में रखकर कड़ी निगरानी की जाती है। नया लिवर शरीर द्वारा रिजेक्ट न कर दिया जाए (Organ Rejection), इसके लिए मरीज को एंटी-रिजेक्शन या इम्यूनोसप्रेसेंट दवाइयां दी जाती हैं।

ट्रांसप्लांट के बाद की जिंदगी: डोनर और रिसीवर दोनों की रिकवरी आसान
कई लोगों में यह भ्रांति होती है कि लिवर दान करने से डोनर का जीवन खतरे में पड़ जाता है, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। डोनर आमतौर पर सर्जरी के एक सप्ताह के भीतर अस्पताल से डिस्चार्ज हो जाते हैं।

3 से 6 हफ्तों में डोनर अपने दैनिक कामकाज सामान्य रूप से करने लगते हैं और 8 से 12 हफ्तों के बाद वे भारी वर्कआउट भी शुरू कर सकते हैं। डोनर की आयु और जीवन की गुणवत्ता पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। वहीं, जिस मरीज में ट्रांसप्लांट हुआ है, उसे ताउम्र नियमित फॉलो-अप, साफ-सफाई और इम्यूनोसप्रेसेंट दवाओं का समय पर सेवन करना अनिवार्य होता है।

यह भी पढ़ें– प्रियंका चोपड़ा ने खास अंदाज में किया श्रीदेवी को याद, शेयर किया बायोग्राफी का पहला लुक

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed