August 21, 2026

Vande Mataram Controversy: शर्मिला टैगोर के बयान पर कंगना रनौत का तंज, बोलीं- ‘इतनी सीमित सोच कैसे?’

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Vande Mataram Controversy: शर्मिला टैगोर के बयान पर कंगना रनौत का तंज, बोलीं- 'इतनी सीमित सोच कैसे?'

शर्मिला टैगोर के बयान पर कंगना रनौत का तंज, बोलीं- 'इतनी सीमित सोच कैसे?'

Vande Mataram Controversy: फिल्म अभिनेत्री और हिमाचल प्रदेश के मंडी से भाजपा सांसद कंगना रनौत एक बार फिर अपने बेबाक बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। इस बार उनके निशाने पर हिंदी सिनेमा की वरिष्ठ अभिनेत्री शर्मिला टैगोर आई हैं। दरअसल, हाल ही में एक साक्षात्कार के दौरान शर्मिला टैगोर ने ‘वंदे मातरम’ को लेकर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि जो लोग केवल एक ईश्वर की पूजा में विश्वास रखते हैं, उनके लिए राष्ट्रगीत के कुछ हिस्सों को स्वीकार करना कठिन हो सकता है। शर्मिला टैगोर की इस टिप्पणी पर पलटवार करते हुए कंगना ने इसे कला के प्रति बेहद सीमित दृष्टिकोण बताया है।

‘कला और कविता को धार्मिक चश्मे से न देखें’

कंगना रनौत ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल पर शर्मिला टैगोर के इंटरव्यू का वीडियो साझा करते हुए एक विस्तृत पोस्ट लिखी। कंगना ने लिखा कि वे शर्मिला जी द्वारा इस मुद्दे पर अपनी राय खुलकर रखने की सराहना करती हैं, लेकिन एक कलाकार होने के नाते उन्हें हैरानी है कि कला और साहित्य को लेकर उनकी समझ इतनी सिमटी हुई कैसे हो सकती है। कंगना के अनुसार, कविता और गीतों में शब्दों का प्रयोग अक्सर रूपकों (metaphors) और प्रतीकों के रूप में किया जाता है, ताकि विचार की गहराई को प्रभावी ढंग से व्यक्त किया जा सके।

स्वामी विवेकानंद और बंकिम चंद्र का दिया उदाहरण

अपने तर्क को मजबूती से रखते हुए कंगना ने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित ‘वंदे मातरम’ का ऐतिहासिक संदर्भ दिया। उन्होंने कहा कि यह गीत भारत के स्वतंत्रता संग्राम की चेतना और जन-जागरण का प्रतीक रहा है। इसके साथ ही उन्होंने स्वामी विवेकानंद का उदाहरण देते हुए लिखा कि जब विवेकानंद जी ने युवाओं से लोहे जैसी मांसपेशियों और बिजली जैसी नसों की बात की थी, तो वह कोई मौसम विज्ञान का भाषण नहीं दे रहे थे, बल्कि युवाओं में राष्ट्र रक्षा का जज्बा भर रहे थे।

‘हिंदू-मुस्लिम की संकीर्ण मानसिकता से बाहर निकलें’

कंगना रनौत ने अपने नोट के आखिर में सभी से ‘हिंदू-मुस्लिम’ के चश्मे से हर विषय को देखना बंद करने की अपील की। उन्होंने लिखा कि हमें इस तरह की बनावटी सोच और सांप्रदायिक चश्मे से बाहर आने की सख्त जरूरत है। हालांकि, अपनी तीखी असहमति और वैचारिक कटाक्ष के बावजूद, पोस्ट के अंत में कंगना ने वरिष्ठ अदाकारा शर्मिला टैगोर के प्रति अपना सम्मान और व्यक्तिगत स्नेह भी व्यक्त किया।

यह भी पढ़ें– ‘जन गण मन’ हटाओ, ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान बनाओ

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