Haryana Mandi Scam: हरियाणा की अनाज मंडियों में किसानों से अवैध वसूली, पूर्व वैज्ञानिक ने राज्य सरकार को भेजा ‘कारण बताओ’ नोटिस

हरियाणा की अनाज मंडियों में किसानों से अवैध वसूली: पूर्व वैज्ञानिक ने राज्य सरकार को भेजा 'कारण बताओ' नोटिस
Haryana Mandi Scam: हरियाणा की अनाज मंडियों में एमएसपी पर अपनी खून-पसीने की उपज बेचने आ रहे अन्नदाताओं की जेब पर डाका डालने का खेल रुकने का नाम नहीं ले रहा है। सरकारी नियमों को ताक पर रखकर किसानों से अवैध रूप से मजदूरी और अन्य आकस्मिक प्रभार वसूले जा रहे हैं।
इस मनमानी के खिलाफ भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. वीरेंद्र सिंह लाठर ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिवक्ता के माध्यम से 19 अगस्त को हरियाणा सरकार को एक कड़ा ‘कारण बताओ नोटिस’ भेजकर प्रशासनिक ढिलाई पर सवाल खड़े किए हैं।
नोटिफिकेशन की अनदेखी: नियम केवल 20 पैसे का, वसूली हजारों की
डॉ. लाठर ने सरकारी आदेशों का हवाला देते हुए साफ किया कि हरियाणा सरकार के गजट नोटिफिकेशन के मुताबिक, समर्थन मूल्य पर सरकारी एजेंसियों द्वारा की जाने वाली खरीद के दौरान आढ़ती किसानों से केवल 20 पैसे प्रति क्विंटल नीलामी शुल्क (Auction Fee) लेने के ही हकदार हैं। मंडियों में होने वाली लेबर (मजदूरी), तुलाई और भराई का पूरा खर्च या तो खरीद एजेंसियां वहन करती हैं या आढ़त से तय होता है। इसके बावजूद मंडियों में आढ़तियों द्वारा किसानों के मत्थे अवैध मजदूरी मढ़ी जा रही है, जो पूरी तरह असंवैधानिक और गैर-कानूनी है।
कच्ची पर्चियों का खेल और प्रशासनिक चुप्पी
पूर्व वैज्ञानिक का कहना है कि सरकार द्वारा बिना पर्ची के लेनदेन और कच्ची पर्चियों पर रोक लगाए जाने के बावजूद आढ़ती नए-नए हथकंडे अपनाकर किसानों को लूट रहे हैं। ‘आकस्मिक शुल्क’ (Incidental Charges) के नाम पर किसानों के बिलों से चोरी-छिपे कटौती कर ली जाती है। हर फसल सीजन में हरियाणा के लाखों किसानों से करोड़ों रुपये की यह अवैध वसूली की जा रही है, जिससे किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
किसानों के हक के लिए कानूनी लड़ाई, सरकार से सख्त एक्शन की मांग
किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए उठाई गई इस आवाज के बाद राज्य के कृषि और मंडी बोर्ड महकमे में हलचल तेज हो गई है। भेजे गए नोटिस में हरियाणा सरकार से मांग की गई है कि सभी अनाज मंडियों में तुरंत जांच टीमें भेजी जाएं और अवैध वसूली करने वाले आढ़तियों के लाइसेंस रद्द किए जाएं। डॉ. लाठर ने उम्मीद जताई है कि सरकार किसानों के हित में कड़ा रुख अपनाएगी। अगर सरकार ने जल्द इस मनमानी पर लगाम नहीं लगाई, तो इस लड़ाई को हाईकोर्ट तक ले जाया जाएगा।
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