Ambala News: अंबाला में तड़के जोरदार धमाके से कांपा आजाद नगर: ट्रैक्टर पार्ट्स फैक्ट्री में लगी भीषण आग, करोड़ों का नुकसान

अंबाला में तड़के जोरदार धमाके से कांपा आजाद नगर: ट्रैक्टर पार्ट्स फैक्ट्री में लगी भीषण आग, करोड़ों का नुकसान
Ambala News: अंबाला के रामपुर सरसेहड़ी मोड़ स्थित आजाद नगर की घनी आबादी के बीच चल रही एक ट्रैक्टर पार्ट्स मैन्युफैक्चरिंग फैक्ट्री शुक्रवार सुबह भयंकर हादसे का शिकार हो गई। तड़के करीब 5 बजे फैक्ट्री के भीतर अचानक एक तेज धमाका हुआ, जिसकी आवाज से आसपास के दर्जनों घरों की खिड़कियों के शीशे तक थरथरा गए। धमाके के तुरंत बाद फैक्ट्री से आग की गगनचुंबी लपटें उठने लगीं और देखते ही देखते पूरी इमारत धुएं के गुबार से घिर गई। हादसे के वक्त लोग नींद में थे, लेकिन तेज आवाज और धुएं की गंध से वहां भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।
फैक्ट्री के मालिक सुशांत अग्रवाल के मुताबिक, वे गुरुवार रात को रोजाना की तरह पूरी यूनिट को शटडाउन करके अपने घर गए थे। सुबह 5 बजकर 7 मिनट पर स्थानीय निवासियों ने उन्हें फैक्ट्री से धुआं और आग निकलने की सूचना दी। आग की लपटें इतनी तेजी से फैलीं कि आसपास के लोग घबराकर अपने मासूम बच्चों और बुजुर्गों को लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे। सूचना मिलते ही डायल 112 की पुलिस टीम और दमकल की गाड़ियां मौके की ओर रवाना की गईं।
दमकल की कार्रवाई पर भड़के फैक्ट्री मालिक, कहा— “समय पर पानी मिलता तो बच जाता नुकसान”
घटनास्थल पर दमकल विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर फैक्ट्री मालिक सुशांत अग्रवाल ने गहरा रोष जताया है। उनका आरोप है कि जब शुरुआत में आग लगी थी, तब उसका दायरा बहुत छोटा था। यदि फायर ब्रिगेड पर्याप्त पानी के साथ समय पर पहुंच जाती तो भारी नुकसान को रोका जा सकता था। उनका दावा है कि जो पहली गाड़ी पहुंची उसमें पानी कम था, जबकि दूसरी गाड़ी को आने में करीब एक घंटा लग गया। तब तक पूरी फैक्ट्री में रखा कीमती कच्चा माल, तैयार ट्रैक्टर पार्ट्स और भारी मशीनरी जलकर स्वाहा हो चुकी थी।
बाढ़ प्रभावित इलाका होने की मार: नहीं था इंश्योरेंस, आर्थिक संकट में फंसा कारोबारी
आग की इस भीषण घटना ने फैक्ट्री मालिक को आर्थिक रूप से पूरी तरह तोड़कर रख दिया है। सुशांत अग्रवाल ने बताया कि यह औद्योगिक क्षेत्र प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित जोन घोषित है। इसी प्रशासनिक वर्गीकरण के कारण पिछले करीब एक साल से कोई भी बीमा कंपनी उनकी फैक्ट्री का इंश्योरेंस नहीं कर रही थी। फैक्ट्री जलकर पूरी तरह राख हो जाने से उन्हें करोड़ों रुपये का सीधा फटका पड़ा है। बीमा न होने के कारण अब इस भारी भरकम नुकसान की भरपाई का कोई जरिया भी नहीं बचा है।
संकरी गलियों और झूलते बिजली के तारों ने बढ़ाई दमकलकर्मियों की चुनौती
मौके पर पहुंचे डायल 112 के प्रभारी प्रदीप राणा ने राहत कार्य में आई व्यावहारिक समस्याओं का ब्योरा दिया। उन्होंने बताया कि पुलिस को सुबह 5:20 बजे हादसे की कॉल मिली थी। क्योंकि यह फैक्ट्री घनी रिहायशी बस्ती के बीचोबीच स्थित है, इसलिए संकरी गलियों में बाहर खड़ी आम लोगों की गाड़ियों और सिर के ऊपर झूलते बिजली के हाई-टेंशन तारों के कारण फायर ब्रिगेड के बड़े वाहनों को अंदर तक लाने में खासी मशक्कत करनी पड़ी। दमकल की गाड़ियों को दूसरे रास्तों से घुमाकर किसी तरह पाइप के जरिए आग बुझाने का काम शुरू कराया गया।
शॉर्ट सर्किट से धमाके की आशंका, पुलिस और फॉरेंसिक टीम करेगी जांच
दमकल विभाग की 5 गाड़ियों ने अलग-अलग दिशाओं से पानी की बौछारें करके घंटों बाद आग की भयावहता पर नियंत्रण पाया। हालांकि, तड़के हुए उस जोरदार धमाके की असली वजह का अभी आधिकारिक खुलासा नहीं हो सका है। शुरुआती तौर पर माना जा रहा है कि अंदर शॉर्ट सर्किट होने से ज्वलनशील रसायनों या गैस सिलेंडर में ब्लास्ट हुआ होगा। पुलिस प्रशासन का कहना है कि आग पूरी तरह ठंडी होने के बाद फॉरेंसिक टीम के साथ फैक्ट्री का मुआयना किया जाएगा, जिसके बाद ही हादसे के असल कारणों और कुल आर्थिक नुकसान का सटीक आकलन हो सकेगा।
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