Gurugram News: अरावली से निकलकर गांव में घुसे तेंदुए, 3 मवेशियों को बनाया शिकार, दहशत में लोग

अरावली से निकलकर गांव में घुसे तेंदुए, 3 मवेशियों को बनाया शिकार, दहशत में लोग
Gurugram News: गुरुग्राम जिले में अरावली की पहाड़ियों के नीचे बसे मोहम्मदपुर गुर्जर गांव में इन दिनों इंसानी आबादी और वन्यजीवों के बीच टकराव का ऐसा मंजर देखने को मिल रहा है, जिसने ग्रामीणों का दिन का चैन और रातों की नींद छीन ली है। इलाके में दो तेंदुओं के सक्रिय होने की खबरों से पूरे गांव में खौफ का माहौल बना हुआ है।
अरावली के घने जंगलों से निकलकर आबादी के करीब आ रहे ये हिंसक वन्यजीव अब तक लाला नामक स्थानीय ग्रामीण की दो बछियों और एक बछड़े को अपना शिकार बना चुके हैं। मवेशियों पर हुए इन ताबड़तोड़ हमलों के बाद से ही ग्रामीणों में इस बात का डर समा गया है कि अगर समय रहते कोई कदम नहीं उठाया गया, तो अगला शिकार कोई इंसान भी हो सकता है।
अंधेरा होते ही थम जाती है चहल-पहल, खेतों की ओर जाने से कतरा रहे किसान
तेंदुओं की मौजूदगी का सबसे बड़ा असर गांव की दिनचर्या और खेती-किसानी पर पड़ा है। आमतौर पर देर शाम तक खेतों में काम करने वाले किसान अब सूरज ढलने से पहले ही अपने घरों की ओर रुख कर लेते हैं। शाम ढलते ही खेतों की ओर जाने वाले रास्ते पूरी तरह सुनसान हो जाते हैं।
अरावली से सटा होने के कारण इस इलाके में घनी झाड़ियां और प्राकृतिक ढलानें हैं, जो तेंदुओं को छिपने और अचानक हमला करने के लिए मुफीद माहौल देती हैं। रात के समय झाड़ियों से आने वाली जरा सी आहट भी ग्रामीणों के रोंगटे खड़े कर देती है।
पशुओं की सुरक्षा के लिए रतजगा, हाथ में लाठी लेकर पहरा देने को मजबूर ग्रामीण
पशुपालकों के लिए अपने मवेशियों को बचाना अब किसी चुनौती से कम नहीं रह गया है। गांव के कई परिवार, जिनके घर पहाड़ियों के करीब बने हैं, अपने पशुओं को बचाने के लिए रात भर जागकर पहरा दे रहे हैं।
पशुपालक लाला ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि उनका घर अरावली की तलहटी में स्थित है, जहां वे अपने पशु बांधते हैं। तेंदुए उनके तीन मवेशियों को खींचकर ले गए। अब स्थिति यह है कि मवेशियों को बाड़े में बांधने के बाद भी मन में अनहोनी का डर बना रहता है। लोग हाथों में लाठी-डंडे और टॉर्च लेकर पूरी रात बाड़ों के आसपास निगरानी करते हैं, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।
बच्चों को बाहर भेजने से डर रहे परिजन, वन विभाग से गुहार
गांव में बढ़ते खौफ का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि परिजनों ने बच्चों को अकेले घर से बाहर निकालना बंद कर दिया है। महिलाएं और बुजुर्ग भी शाम के बाद घरों में ही दुबकने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और वन विभाग को इस मामले में तुरंत संज्ञान लेना चाहिए। उनकी मांग है कि अरावली के संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ाई जाए और गांव के आसपास पिंजरे लगाकर दोनों तेंदुओं को सुरक्षित रूप से रेस्क्यू कर घने जंगल में छोड़ा जाए। मोहम्मदपुर गुर्जर गांव में इस समय सवाल सिर्फ पशुधन का नहीं, बल्कि इंसानी जिंदगी की सुरक्षा का भी बन गया है।
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