पंजाब में कर्मचारी Vs सरकार: हड़ताल के बाद गैरहाजिर मुलाजिमों को नोटिस, CM मान को अनफॉलो करने की मुहिम

पंजाब में कर्मचारी Vs सरकार
Punjab Employees Strike: पंजाब में सरकारी कर्मचारियों की 27 अगस्त की महाहड़ताल के बाद सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच टकराव बढ़ गया है। सरकार ने बिना मंजूरी ड्यूटी से गैरहाजिर रहने वाले कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के आदेश दिए हैं। वहीं, कर्मचारी संगठनों ने भी पीछे हटने से इनकार करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ सोशल मीडिया पर अभियान शुरू किया है।
कर्मचारी यूनियनों की ओर से मुलाजिमों से मुख्यमंत्री भगवंत मान को फेसबुक, X और इंस्टाग्राम पर अनफॉलो करने की अपील की जा रही है। दूसरी तरफ, सरकार ने सभी विभागों से उन कर्मचारियों की जानकारी मांगी है जो हड़ताल के दौरान बिना अनुमति ड्यूटी से अनुपस्थित रहे।
बिना मंजूरी गैरहाजिरी पर देना होगा जवाब
सरकार के निर्देश के मुताबिक, 27 अगस्त को हड़ताल के दौरान बिना पूर्व अनुमति या स्वीकृति के ड्यूटी से गैरहाजिर रहने वाले कर्मचारियों को शो-कॉज नोटिस जारी किए जाएंगे। कर्मचारियों को अपनी गैरहाजिरी के संबंध में जवाब देना होगा।
नोटिस के जवाब की जांच के बाद संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने सभी विभागों के सेक्रेटरीज को ऐसे कर्मचारियों की सूची तैयार कर भेजने के निर्देश दिए हैं।
8 मांगों को लेकर कर्मचारियों ने की थी महाहड़ताल
पंजाब सरकार के करीब 3 लाख कर्मचारी बकाया DA, ओल्ड पेंशन स्कीम और कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने समेत 8 मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। इन्हीं मांगों को लेकर कर्मचारियों ने 27 अगस्त को सामूहिक छुट्टी लेकर महाहड़ताल की थी।
हड़ताल के बाद सरकार ने कर्मचारी नेताओं के साथ बैठक तय की थी। बैठक पहले चंडीगढ़ स्थित पंजाब भवन में तय हुई और बाद में इसे जालंधर के PAP कॉम्प्लेक्स में रखा गया।
CM बोले- पहले हड़ताल खत्म करो, फिर होगी बातचीत
कर्मचारी नेताओं के मुताबिक, बैठक से करीब एक घंटे पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान ने साफ कर दिया था कि पहले हड़ताल खत्म करनी होगी, उसके बाद बातचीत होगी। इसके बाद कर्मचारी नेता PAP कॉम्प्लेक्स पहुंचे, लेकिन मुख्यमंत्री बैठक के लिए नहीं आए।
कर्मचारी नेताओं के अनुसार, एक अधिकारी ने उनसे कहा कि पहले हड़ताल खत्म करने का वीडियो जारी किया जाए, उसके बाद मुख्यमंत्री बैठक करेंगे। कर्मचारी नेता इस पर सहमत नहीं हुए और इसके बाद मुख्यमंत्री की बैठक रद्द कर दी गई।
बैठक नहीं होने के बाद सरकार ने सभी विभागों के सेक्रेटरीज को पत्र जारी कर हड़ताल के दौरान बिना उचित कारण ड्यूटी से गैरहाजिर रहने वाले कर्मचारियों की सूची मांगी। अब इन्हीं कर्मचारियों को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दिए गए हैं।
कर्मचारी नेता बोले- लेटर वापस नहीं हुए तो बातचीत नहीं
साझा मुलाजिम मंच के नेता सुखचैन सिंह खैहरा ने सरकार के रुख पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने कर्मचारियों के खिलाफ जारी किए गए लेटर वापस नहीं लिए तो सरकार से कोई बातचीत नहीं की जाएगी।
खैहरा के मुताबिक, लुधियाना में होने वाली बैठक में सरकार की कार्रवाई के खिलाफ सख्त फैसला लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार की तरफ से बातचीत की कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रही तो कर्मचारी संगठन आगे की रणनीति तय करेंगे।
लुधियाना में बैठक, अगले संघर्ष का ऐलान संभव
सरकारी कर्मचारियों के साझा मोर्चे ने लुधियाना में बैठक बुलाई है। इसमें सरकार की ओर से जारी नोटिस और कर्मचारियों की मांगों पर चर्चा होगी। कर्मचारी नेता बैठक में आगे के संघर्ष का ऐलान करने की बात कह रहे हैं।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सरकार की ओर से कार्रवाई किए जाने के बावजूद वे अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे। नेताओं ने यहां तक कहा है कि सरकार चाहे एस्मा लगाए, कर्मचारी संघर्ष जारी रखेंगे।
CM मान को सोशल मीडिया पर अनफॉलो करने की मुहिम
सरकार की कार्रवाई के जवाब में कर्मचारी संगठनों ने सोशल मीडिया पर भी अभियान शुरू किया है। मुलाजिमों से मुख्यमंत्री भगवंत मान को X, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर अनफॉलो करने की अपील की जा रही है।
लुधियाना के कर्मचारी नेता तेजिंदर सिंह नंगल ने कहा कि कर्मचारी पहले मुख्यमंत्री को सोशल मीडिया पर फॉलो करते थे, लेकिन बैठक के लिए बुलाए जाने के बावजूद मुख्यमंत्री के नहीं आने से उनमें नाराजगी है। इसी के चलते कर्मचारियों से मुख्यमंत्री को अनफॉलो करने की अपील की जा रही है।
अब पंजाब सरकार की ओर से जारी नोटिस और कर्मचारियों की अगली रणनीति के बीच दोनों पक्षों के बीच गतिरोध बढ़ता दिख रहा है। लुधियाना की बैठक के बाद कर्मचारी संगठनों के अगले कदम से इस विवाद की दिशा साफ हो सकती है।
