September 2, 2026

Haryana RTI Rule: हरियाणा में RTI आवेदनों पर मुख्य सचिव का सख्त रुख, 30 दिन में देना होगा जवाब, अफसरों की बढ़ेगी निगरानी

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Haryana RTI Rule: हरियाणा में RTI आवेदनों पर मुख्य सचिव का सख्त रुख: 30 दिन में देना होगा जवाब, अफसरों की बढ़ेगी निगरानी

हरियाणा में RTI आवेदनों पर मुख्य सचिव का सख्त रुख: 30 दिन में देना होगा जवाब, अफसरों की बढ़ेगी निगरानी

Haryana RTI Rule: हरियाणा के सरकारी विभागों में पारदर्शी शासन व्यवस्था और जवाबदेही तय करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब राज्य जन सूचना अधिकारियों (SPIO) के पास आने वाले ऑनलाइन आरटीआई (RTI) आवेदनों की सीधी निगरानी प्रशासनिक सचिव और विभागाध्यक्ष खुद करेंगे।

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने इस संबंध में राज्य के सभी विभागों, बोर्डों, निगमों और प्राधिकरणों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। सरकार का साफ कहना है कि जनता द्वारा मांगी गई सूचनाओं को ठंडे बस्ते में डालने वाले अफसरों की अब खैर नहीं होगी।

15 जून के सूचना आयोग के आदेश के बाद एक्शन, समय पर जवाब न देना माना जाएगा ‘रिजेक्शन’

मुख्य सचिव की ओर से यह प्रशासनिक फरमान हरियाणा राज्य सूचना आयोग के 15 जून 2026 को आए एक महत्वपूर्ण फैसले के बाद जारी किया गया है। आयोग ने अपने आदेश में बेहद सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया था कि यदि कोई ऑनलाइन आरटीआई आवेदन बिना किसी जायज वजह के लंबित पड़ा रहता है, तो इसे आरटीआई अधिनियम 2005 के तहत ‘मानी गई अस्वीकृति’ (Deemed Refusal) माना जाएगा। ऐसी लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।

30 दिन की डेडलाइन, जीवन-स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में केवल 48 घंटे का वक्त

नए निर्देशों के तहत समयसीमा का सख्ती से पालन करने को कहा गया है। आम मामलों में जन सूचना अधिकारी को आवेदन मिलने के 30 दिनों के भीतर आवेदक को मांगी गई जानकारी उपलब्ध करानी होगी। वहीं, अगर मामला किसी व्यक्ति के जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा है, तो सूचना अधिकारी को महज 48 घंटे के भीतर सूचना मुहैया करानी होगी।

अधिकारियों को हिदायत दी गई है कि वे अपने-अपने विभागों के ऑनलाइन पोर्टल को रोजाना चेक करें और लंबित आवेदनों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित करें।

वेबसाइटों पर अपलोड करनी होगी धारा-4 की अनिवार्य सूचनाएं

इसके साथ ही, मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने आरटीआई कानून को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए धारा 4 (Disclosures) को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं।

राज्य के सभी सार्वजनिक प्राधिकरणों को अपने प्रशासनिक ढांचे, नियमों, योजनाओं और बजट से जुड़ी बुनियादी सूचनाओं को अपनी आधिकारिक वेबसाइटों पर खुद ही अपलोड (Proactive Disclosure) करना होगा। सरकार का मानना है कि यदि विभाग अपनी पूरी जानकारी पहले से ही सार्वजनिक रखेंगे, तो आम नागरिकों को छोटी-छोटी सूचनाओं के लिए बार-बार आरटीआई दाखिल करने की नौबत ही नहीं आएगी।

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