Haryana Monsoon Session: हरियाणा मानसून सत्र के बाद गरमाई सियासत! भूपेंद्र हुड्डा बोले- आंकड़े छिपाकर जनता को गुमराह कर रही सरकार

हरियाणा मानसून सत्र के बाद गरमाई सियासत! भूपेंद्र हुड्डा बोले- आंकड़े छिपाकर जनता को गुमराह कर रही सरकार
Haryana Monsoon Session: हरियाणा विधानसभा के 3 दिवसीय मानसून सत्र के हंगामेदार समापन के बाद सूबे की सियासत का पारा चढ़ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने चंडीगढ़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मौजूदा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। हुड्डा ने सत्र के दौरान हुए घटनाक्रम को अपने दशकों लंबे राजनीतिक करियर का सबसे अलोकतांत्रिक दौर करार दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास विपक्ष द्वारा उठाए गए जनहित के तीखे सवालों का कोई जवाब नहीं था, इसीलिए विपक्ष की आवाज दबाने और आंकड़ों में हेरफेरी करने का काम किया गया। इस दौरान राज्यसभा सांसद कर्मवीर बौद्ध, वरिष्ठ विधायक गीता भुक्कल, अशोक अरोड़ा, बीबी बत्रा और आफताब अहमद सहित कई प्रमुख कांग्रेसी नेता मौजूद रहे।
तख्तियों पर रोक और दोहरे रवैये पर उठाए सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पूर्व सीएम हुड्डा ने कहा, “मैंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में विधानसभा के भीतर और बाहर कभी ऐसा माहौल नहीं देखा। सरकार अपनी पोल खुलने के डर से घबराई हुई थी, जिसके चलते विधायकों को अलोकतांत्रिक तरीके से रोका गया।”
उन्होंने मुख्यमंत्री के बयानों पर चुटकी लेते हुए कहा कि सीएम प्रेस कॉन्फ्रेंस करके विपक्ष के विधायकों को गलत ठहराने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं। सवाल यह उठता है कि अगर विधानसभा के पहले दिन विधायकों को तख्तियां ले जाने से रोका गया, तो दूसरे दिन छूट क्यों दे दी गई? यह सरकार की विफलता और दोहरे रवैये को साफ दिखाता है।
सफाई कर्मियों और HKRN के मुद्दे पर सरकार को घेरा
सफाई कर्मचारियों के मुद्दे पर बोलते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि ‘काम रोको प्रस्ताव’ पर चर्चा शुरू होने से पहले ही मंत्री का लिखित जवाब आ जाना स्थापित संसदीय परंपराओं के पूरी तरह खिलाफ था। मंत्री दावा कर रहे हैं कि कर्मचारियों को पक्का करने की मांग पर राय ली जा रही है, जबकि सच यह है कि 2014 में हमारी सरकार ने ही इन्हें पक्का करने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया था, जिसमें आरक्षण का भी स्पष्ट प्रावधान था।
वहीं, हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRN) को बड़ा छलावा करार देते हुए हुड्डा ने कहा कि खुद मुख्यमंत्री ने सदन के पटल पर माना है कि इसके तहत दी जाने वाली नौकरियां स्थायी नहीं हैं। सरकार जॉब सिक्योरिटी के लंबे-चौड़े दावे कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि युवा उनसे आकर मिल रहे हैं, जिन्हें महज एक व्हाट्सएप मैसेज भेजकर रातों-रात नौकरी से बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है।
‘सदन और जनता को गुमराह कर रही सरकार’
हुड्डा ने राज्य सरकार पर विधानसभा के पटल पर गलत और भ्रामक आंकड़े पेश करने का संगीन आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सदन के भीतर गलत आंकड़े रखना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह सीधे तौर पर प्रदेश की ढाई करोड़ जनता के साथ धोखा है। विपक्ष जनहित के हर मुद्दे को सड़क से लेकर सदन तक पूरी मजबूती से उठाता रहेगा।
