Kurukshetra News: कुरुक्षेत्र में बगावत के सुर, बीकेयू शहीद भगत सिंह का अल्टीमेटम- ‘नहीं हुई खरीद तो DC दफ्तर पर गिराएंगे धान’

कुरुक्षेत्र में बगावत के सुर, बीकेयू शहीद भगत सिंह का अल्टीमेटम- 'नहीं हुई खरीद तो DC दफ्तर पर गिराएंगे धान'
Kurukshetra News: हरियाणा के धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र में एक बार फिर किसान और सरकार आमने-सामने आ गए हैं। इस बार वजह बनी है धान की अगेती फसल की आवक और सरकारी खरीद में संभावित देरी। बुधवार को भारतीय किसान यूनियन (शहीद भगत सिंह) समेत विभिन्न किसान संगठनों के प्रतिनिधियों और किसानों ने कुरुक्षेत्र के लघु सचिवालय पर धावा बोला और सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर गुब्बार निकाला।
किसानों का साफ कहना है कि खेतों में फसल पककर तैयार है, लेकिन सरकार खरीद शुरू करने की तारीखों को लटकाने की मंशा में है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
15 सितंबर से शुरू हो खरीद, वरना जीटी रोड पर बिखरेगी फसल
प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे यूनियन के प्रदेश प्रधान संजू नंबरदार ने प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से सरकार तक अपनी बात पहुंचाते हुए दोटूक चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि 15 सितंबर से हर हाल में मंडियों में धान की सरकारी खरीद शुरू हो जानी चाहिए।
संजू नंबरदार ने तीखे लहजे में कहा, “यदि सरकार ने किसानों के सब्र का इम्तिहान लिया और 15 सितंबर से खरीद प्रक्रिया शुरू नहीं की, तो किसान अपनी उपज को जीटी रोड (GT Road) पर उडेलने के लिए मजबूर होंगे। यही नहीं, प्रदेश भर के तमाम जिलों में उपायुक्त (DC) कार्यालयों के बाहर धान के ढेर लगाकर सरकार की नीतियों का विरोध किया जाएगा।”
17 नहीं, 20 प्रतिशत नमी पर ली जाए धान
किसान नेताओं ने मंडी में धान खरीद के दौरान नमी (Moisture) के मानकों में छूट देने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। फिलहाल सरकार 17 प्रतिशत तक की नमी वाले धान की ही खरीद करती है।
किसानों की दलील है कि हाल के दिनों में हुए मौसमी बदलावों और शुरुआती कटाई के कारण धान में नमी का स्तर कुछ ज्यादा रहता है। ऐसे में 17 फीसदी की पाबंदी के चलते मंडियों में किसानों को औने-पौने दामों पर अपनी फसल बेचनी पड़ती है या फिर हफ्तों तक सुखाने का इंतजार करना पड़ता है। किसानों ने मांग की है कि नमी की यह सीमा 17 से बढ़ाकर 20 प्रतिशत की जाए।
‘चीनी के दाम बढ़े तो गन्ने का भाव क्यों नहीं?
‘धान के अलावा किसान नेताओं ने प्रदेश के गन्ना उत्पादकों का दर्द भी बयां किया। उन्होंने कहा कि जब बाजार में चीनी के दाम आसमान छू रहे हैं और मिल मालिकों का मुनाफा बढ़ रहा है, तो उसका सीधा लाभ गन्ना उगाने वाले किसान तक क्यों नहीं पहुंच पा रहा?
किसानों ने गन्ने के राज्य परामर्शित मूल्य (SAP) में बढ़ोतरी करने के साथ-साथ सभी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी का कानून बनाने की अपनी पुरानी मांग को फिर से दोहराया।
10 सितंबर को पिहोवा अनाज मंडी में महापंचायत
आंदोलन की आगे की रूपरेखा साझा करते हुए किसान नेताओं ने बताया कि 10 सितंबर को कुरुक्षेत्र की पिहोवा अनाज मंडी में एक विशाल ‘किसान महापंचायत’ का आयोजन किया जाएगा। संजू नंबरदार ने कहा कि अगर 10 सितंबर से पहले सरकार ने किसान संगठनों को वार्ता के लिए नहीं बुलाया या कोई ठोस प्रशासनिक कदम नहीं उठाया, तो इसी महापंचायत के मंच से पूरे हरियाणा में एक बड़े और अनिश्चितकालीन आंदोलन का औपचारिक बिगुल फूंक दिया जाएगा।
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