September 5, 2026

Dry Farming fact: बिना पानी और सिंचाई के 40 साल तक उगाईं फसलें, जानें अमेरिकी किसान की ‘ड्राई फार्मिंग’ का सच

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Dry Farming fact: बिना पानी और सिंचाई के 40 साल तक उगाईं फसलें, जानें अमेरिकी किसान की 'ड्राई फार्मिंग' का सच

बिना पानी और सिंचाई के 40 साल तक उगाईं फसलें, जानें अमेरिकी किसान की 'ड्राई फार्मिंग' का सच

Dry Farming fact: बदलते मौसम, लगातार गिरते भूजल स्तर और बढ़ते जल संकट के बीच खेती करना दुनिया भर के किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे दौर में अमेरिका के एक किसान ने खेती की एक ऐसी तरकीब खोज निकाली है, जो किसी चमत्कार से कम नहीं लगती। इस किसान ने बिना किसी कृत्रिम सिंचाई के लगातार 40 वर्षों तक टमाटर, आलू, लहसुन और बीन्स जैसी फसलों की बंपर पैदावार कर हर किसी को हैरत में डाल दिया है। खेती के इस अनोखे तरीके को तकनीक की दुनिया में ‘ड्राई फार्मिंग’ (Dry Farming) कहा जाता है।

40 वर्षों का अनुभव और चिकनी मिट्टी का कमाल

अमेरिका के ऑरिगन राज्य में रहने वाले इस किसान के लिए ड्राई फार्मिंग कोई नया प्रयोग नहीं है। उन्होंने करीब चार दशकों के लंबे अनुभव से यह साबित किया है कि अगर मिट्टी का सही चुनाव किया जाए और उसे वैज्ञानिक तरीके से तैयार किया जाए, तो बिना पानी के भी खेत लहलहा सकते हैं।

इस तकनीक में सबसे ज्यादा ध्यान मिट्टी की बनावट पर दिया जाता है। किसान ने ऐसी चिकनी मिट्टी (Clay Soil) वाले खेत का चयन किया, जो नमी को लंबे समय तक अपने भीतर सोखकर रख सकती है। वसंत के मौसम में खेत की जुताई इस तरह की जाती है कि मिट्टी में मौजूद प्राकृतिक नमी भाप बनकर उड़ने के बजाय जमीन के भीतर ही कैद हो जाए।

9.6 एकड़ में फैले खेत और ऑरिगन यूनिवर्सिटी की मुहर

किसान ने शुरुआत में ड्राई फार्मिंग कैलिफोर्निया में की थी, लेकिन साल 2007 में वे ऑरिगन शिफ्ट हो गए और वहां 9.6 एकड़ जमीन पर बिना पानी के खेती की शुरुआत की। ऑरिगन यूनिवर्सिटी द्वारा 2014 में प्रकाशित एक शोध अध्ययन में भी इस किसान के 1974 से लेकर 2014 तक के प्रयोगों को पूरी तरह प्रामाणिक पाया गया।

अध्ययन के मुताबिक, उन्होंने चार दशकों तक बिना एक बूंद अतिरिक्त सिंचाई के केवल ऑर्गेनिक टमाटर, लहसुन और बीन्स की पैदावार हासिल की।

बीजारोपण की खास तकनीक और पौधों के बीच की दूरी

ड्राई फार्मिंग में बीज बोने का तरीका सामान्य खेती से थोड़ा अलग होता है। इसमें बीजों को मिट्टी की उस गहराई में बोया जाता है, जहां जमीन की प्राकृतिक नमी सबसे ज्यादा मौजूद होती है। इसके अलावा, पौधों के बीच उचित दूरी रखी जाती है ताकि सीमित पानी और पोषक तत्वों के लिए जड़ों के बीच आपस में होड़ न मचे।

हालांकि, कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि ड्राई फार्मिंग हर इलाके में एक जैसी सफल नहीं हो सकती। इसके लिए स्थानीय मौसम, बारिश के पैटर्न और मिट्टी के प्रकार का सही मेल होना बेहद जरूरी है। इसके बावजूद, जिन इलाकों में पानी का गंभीर संकट है, वहां यह तकनीक खेती का एक क्रांतिकारी विकल्प साबित हो सकती है।

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