September 7, 2026

PSPCL Solar Power Agreement Cancelled : पंजाब के हाथ से निकला 2.61 रुपए में सस्ती बिजली का सौदा

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PSPCL Solar Power Agreement Cancelled : पंजाब के हाथ से निकला 2.61 रुपए में सस्ती बिजली का सौदा

पंजाब के हाथ से निकला 2.61 रुपए में सस्ती बिजली का सौदा

PSPCL Solar Power Agreement Cancelled :  आर्थिक तंगी और बिजली संकट से जूझ रहे पंजाब के लिए एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। पावरकॉम (PSPCL) की ढुलमुल कार्यशैली और प्रशासनिक सुस्ती की बदौलत राज्य ने केंद्र सरकार से 25 सालों तक मिलने वाली सस्ती सोलर पावर का एक बेहतरीन मौका गंवा दिया है।

सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) पंजाब को महज 2.61 रुपये प्रति यूनिट की बेहद रियायती दर पर 250 मेगावाट सोलर बिजली देने वाला था। हालांकि, तय मियाद के भीतर पावरकॉम द्वारा पावर परचेज़ एग्रीमेंट (PPA) साइन न किए जाने से नाराज केंद्र ने यह अलॉटमेंट रद्द कर दिया है और यह बिजली किसी दूसरे राज्य को सौंप दी है।

तुलना के तौर पर देखें तो एक तरफ पंजाब 2.61 रुपये की सस्ती ग्रीन एनर्जी हासिल करने में नाकाम रहा, तो वहीं दूसरी तरफ पावरकॉम अपनी दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए शॉर्ट-टर्म टेंडर के जरिए ट्रेडर्स से 8 रुपये प्रति यूनिट तक की बेहद महंगी दरों पर बिजली खरीदने को मजबूर है।

रेगुलेटरी कमीशन के आदेश को भी पावरकॉम ने दिखाया ठेंगा

इस पूरे मामले की टाइमलाइन पर नजर डालें तो पावरकॉम के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 21 नवंबर, 2025 को ही इस खरीद को मंजूरी दे दी थी। इसके बाद पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (PSERC) ने 6 जुलाई, 2026 को 250 मेगावाट बिजली की खरीद पर अपनी अंतिम मुहर लगाते हुए पावरकॉम को जल्द से जल्द अनुबंध फाइनल करने के निर्देश दिए थे।

कमीशन ने साफ कहा था कि यह खरीद राज्य की भावी जरूरतों और वित्तीय मापदंडों के हिसाब से बिल्कुल सही है। इसके बावजूद पावरकॉम के अधिकारियों ने समझौते पर हस्ताक्षर करने में अकारण देरी की।

SECI ने 23 जुलाई को पत्र भेजकर 28 जुलाई तक एग्रीमेंट पूरा करने की डेडलाइन दी थी। डेडलाइन बीतने के बाद 29 जुलाई को पावरकॉम ने जवाब दिया कि ‘बोर्ड की मंजूरी बाकी है’, जबकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि बोर्ड पहले ही इसे हरी झंडी दे चुका था।

20 अगस्त को रद्द हुआ अलॉटमेंट, अब लीगल एक्शन की तैयारी में पावरकॉम

बार-बार रिमाइंडर और पत्राचार के बाद भी जब पावरकॉम की तरफ से कोई ठोस जवाब नहीं आया, तो SECI ने 20 अगस्त को औपचारिक नोटिफिकेशन जारी कर अलॉटमेंट रद्द कर दिया। यह बिजली ‘मैन्युफैक्चरिंग-लिंक्ड स्कीम’ के तहत पंजाब को मिलनी तय हुई थी। अब सवाल यह उठ रहा है कि जब पावरकॉम अरबों रुपये के घाटे में चल रहा है, तब अफसरों की इस लापरवाही की भरपाई कौन करेगा?

मामले पर सफाई देते हुए पावरकॉम के चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. बसंत गर्ग ने कहा कि रेगुलेटरी कमीशन ने कनेक्टिविटी ठीक होने की शर्त पर ही एग्रीमेंट करने को कहा था।

चूंकि संबंधित कंपनी इस शर्त को मानने के लिए तैयार नहीं थी, इसलिए समझौता अंतिम रूप नहीं ले सका। गर्ग ने दावा किया है कि पावरकॉम अब SECI द्वारा अलॉटमेंट रद्द करने और पंजाब का कोटा दूसरे राज्य को देने के फैसले के खिलाफ कानूनी रास्ता (Legal Action) अपनाएगा।

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