September 8, 2026

Radaur News: “रोजगार मांगने वाली नहीं, देने वाली बनें महिलाएं”, कांजनू में गूंजा स्वावलंबन का नारा

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Radaur News: "रोजगार मांगने वाली नहीं, देने वाली बनें महिलाएं", कांजनू में गूंजा स्वावलंबन का नारा

"रोजगार मांगने वाली नहीं, देने वाली बनें महिलाएं"

Radaur News: संजीव चौहान (यमुनानगर) ग्रामीण भारत में जब आधी आबादी अपने हुनर को पहचान कर कदम आगे बढ़ाती है, तो पूरे समाज की तस्वीर बदल जाती है। कुछ ऐसा ही नजारा रादौर खंड के गांव कांजनू में देखने को मिला, जहां स्वदेशी जागरण मंच एवं स्वावलंबी भारत अभियान के तत्वावधान में महिला उद्यमिता सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में क्षेत्र के विभिन्न गांवों से पहुंची करीब 100 महिलाओं का उत्साह देखते ही बनता था। सम्मेलन का सबसे भावुक और प्रेरणादायी पल वह रहा, जब अपनी मेहनत, लगन और उद्यमिता के दम पर समाज में अपनी खास पहचान बनाने वाली 46 प्रतिभावान महिलाओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन कार्यक्रम प्रमुख एवं जिला महिला प्रमुख डॉ. मीनाक्षी मकलोहा ने किया।

स्वदेशी केवल वस्तुएं नहीं, जीवन-मूल्य और आत्मसम्मान से जुड़ा विचार है: डॉ. दीपमाला

सम्मेलन में मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत करते हुए स्वदेशी जागरण मंच हरियाणा की प्रांत महिला प्रमुख डॉ. दीपमाला ने ग्रामीण महिलाओं में ऊर्जा का संचार किया। उन्होंने स्वदेशी की अवधारणा को बेहद सरल और व्यापक संदर्भ में समझाते हुए कहा कि स्वदेशी का मतलब केवल देश में बनी वस्तुओं का इस्तेमाल करना भर नहीं है, बल्कि अपनी समृद्ध परंपराओं, संस्कृति, वेशभूषा, भाषा और उच्च जीवन-मूल्यों को अपनाना भी इसका अहम हिस्सा है।

डॉ. दीपमाला ने जोर देकर कहा, “स्वदेशी महज एक आर्थिक मॉडल नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, आत्मनिर्भरता और राष्ट्र निर्माण से जुड़ी एक जीवन-दृष्टि है। जब एक महिला आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनती है, तो वह केवल अपना नहीं बल्कि पूरे परिवार, समाज और राष्ट्र का भविष्य संवारती है।”

‘रोजगार मांगने वाली नहीं, रोजगार देने वाली उद्यमी बनें ग्रामीण महिलाएं’

डॉ. दीपमाला ने कहा कि हर महिला के भीतर कोई न कोई विशेष योग्यता और सामर्थ्य छुपा होता है। जरूरत बस उसे पहचानने और तराशने की है। चाहे वह सिलाई-कढ़ाई हो, हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण (फूड प्रोसेसिंग), घरेलू उत्पाद निर्माण हो या फिर डिजिटल सेवाएं—छोटे स्तर से शुरू किया गया कदम भी आगे चलकर एक बड़े उद्यम का रूप ले सकता है।

उन्होंने ग्रामीण महिलाओं से आह्वान किया कि वे अपने पारंपरिक कौशल और स्थानीय संसाधनों को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ें। महिलाओं को केवल नौकरियां तलाशने वाली नहीं, बल्कि दूसरों को रोजगार देने वाली ‘जॉब क्रिएटर’ बनने का संकल्प लेना होगा।

आर्थिक आत्मनिर्भरता ही सशक्त राष्ट्र की सबसे मजबूत नींव: सुमन लता

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचीं समाजसेवी श्रीमती सुमन लता ने कहा कि किसी भी समाज को सशक्त बनाने का रास्ता महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन से होकर ही गुजरता है। जब महिला अपने पैरों पर खड़ी होती है, तो परिवार में उसका सम्मान और निर्णय लेने की क्षमता दोनों मजबूत होते हैं।

इस दौरान पार्षद श्रीमती संगीता कम्बोज और गांव की सरपंच श्रीमती रिम्पी कम्बोज ने सम्मेलन में पहुंची महिलाओं और ‘सखी-सहेली फाउंडेशन’ की टीम का आभार जताया। उन्होंने स्वदेशी जागरण मंच और स्वावलंबी भारत अभियान द्वारा ग्रामीण अंचल में महिला सशक्तिकरण के लिए चलाए जा रहे इस अभियान की भूरि-भूरि प्रशंसा की।

“मैं भी कर सकती हूं” के संकल्प के साथ सम्पन्न हुआ सम्मेलन

सम्मेलन में सम्मानित हुई 46 उद्यमी महिलाओं ने जब मंच से अपने संघर्ष और सफलता की कहानियां साझा कीं, तो सभागार तालियों से गूंज उठा। उनकी प्रेरक यात्रा ने वहां मौजूद अन्य ग्रामीण महिलाओं के मन में भी “मैं भी कर सकती हूं” का मजबूत आत्मविश्वास जगाया। कार्यक्रम का समापन स्वदेशी उत्पादों को अपनाने, आत्मनिर्भर बनने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।

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