September 10, 2026

गुजरात में ₹635 करोड़ के साइबर फ्रॉड का खुलासा, 10 लाख से ज़्यादा ऐप डाउनलोड जांच के दायरे, 6 आरोपी गिरफ़्तार

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गुजरात में ₹635 करोड़ के साइबर फ्रॉड का खुलासा, 10 लाख से ज़्यादा ऐप डाउनलोड जांच के दायरे, 6 आरोपी गिरफ़्तार

अमरेली पुलिस ने 6 आरोपियों को पकड़ा

Gujarat Cyber Scam: गुजरात के अमरेली में पुलिस ने बड़े कथित साइबर-फ्रॉड नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। पुलिस जांच में SD Pay और Apna Pay जैसे मोबाइल ऐप के जरिए निवेश के नाम पर लोगों को असामान्य दैनिक रिटर्न, कैशबैक और जल्द मुनाफे का लालच देने का आरोप है। इस मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और 15 बैंक खातों में ₹635 करोड़ से ज्यादा के लेनदेन और जमा का पता चला है। मामले की जांच अब अमरेली से आगे बढ़कर पूरे गुजरात और देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंच गई है। पुलिस के मुताबिक SD Pay ऐप के 10 लाख से ज्यादा डाउनलोड दर्ज हुए और ऐप पर करीब 3.5 लाख लोगों का नाम और मोबाइल नंबर समेत डेटा मिला है। संभावित पीड़ितों की पहचान के लिए पुलिस इस डेटा का भौगोलिक विश्लेषण कर रही है।

सात फर्जी कंपनियां बनाकर नेटवर्क चलाने का आरोप

पुलिस की जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने कथित नेटवर्क चलाने के लिए सात फर्जी कंपनियां बनाई थीं। इनमें SD Hub, Shiv Dharti Communication और Upay Digi के नाम शामिल हैं। इन कंपनियों से जुड़े 15 बैंक खातों की जांच में अब तक ₹635 करोड़ से ज्यादा के लेनदेन और जमा सामने आए हैं। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि इतनी बड़ी रकम कहां से आई और इन पैसों का इस्तेमाल किस तरह किया गया। इस मामले में मुख्य शिकायतकर्ता कथित तौर पर एक पुलिसकर्मी की पत्नी हैं। शिकायत के बाद शुरू हुई जांच में पुलिस को ऐप, कंपनियों और बैंक खातों के बीच जुड़े नेटवर्क की जानकारी मिली।

SD Pay ऐप के जरिए रेफरल नेटवर्क का विस्तार

जांचकर्ताओं के अनुसार आरोपियों ने SD Pay ऐप विकसित करके उसे Play Store पर अपलोड किया था। ऐप पर बिल भुगतान और मोबाइल रिचार्ज जैसी सेवाएं उपलब्ध थीं, लेकिन पुलिस का आरोप है कि रेफरल सिस्टम के जरिए नए लोगों को जोड़ने और नेटवर्क बढ़ाने पर खास जोर दिया गया। पुलिस के मुताबिक ऐप से करीब 1.5 लाख से 2.5 लाख लोग रेफरेंस के जरिए जुड़े हो सकते हैं। कैशबैक बोनस और अलग-अलग स्तरों पर इंसेंटिव देकर यूजर्स को दूसरे लोगों को नेटवर्क में शामिल करने के लिए प्रोत्साहित किए जाने की बात जांच में सामने आई है। यही वजह है कि पुलिस अब सिर्फ बैंक खातों की जांच तक सीमित नहीं है। ऐप से जुड़े यूजर्स और रेफरल डेटा के आधार पर यह पता लगाया जा रहा है कि नेटवर्क कितने राज्यों और शहरों तक पहुंचा था।

अहमदाबाद से सूरत तक छोटे निवेशक जांच के केंद्र में

पुलिस को आशंका है कि इस कथित धोखाधड़ी में गुजरात के बड़ी संख्या में छोटे निवेशक प्रभावित हुए हैं। अहमदाबाद, गांधीनगर, मेहसाणा और सूरत समेत कई बड़े शहरों से जुड़े लोगों की जानकारी जांच में सामने आ रही है। राष्ट्रीय साइबरक्राइम रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म पर इन कंपनियों से जुड़े बैंक खातों के खिलाफ देश के अलग-अलग हिस्सों से 83 साइबर-फ्रॉड शिकायतें भी दर्ज मिली हैं। इससे जांच का दायरा गुजरात से बाहर तक जाने की संभावना बढ़ गई है। पुलिस के पास ऐप पर रजिस्टर्ड करीब 3.5 लाख लोगों का डेटा है। अधिकारियों का कहना है कि इस डेटा की लोकेशन के आधार पर पड़ताल कर संभावित पीड़ितों को चिन्हित करने की कोशिश की जा रही है।

₹1,000 के न्यूनतम निवेश से भी बड़ी रकम का अनुमान

प्रारंभिक पुलिस आकलन में कहा गया है कि अगर ऐप पर रजिस्टर्ड सिर्फ 20 से 50 फीसदी लोगों ने भी कम से कम ₹1,000 का निवेश किया हो, तो कुल रकम काफी बड़ी हो सकती है। जिला पुलिस की शुरुआती जांच में फिलहाल करीब ₹65 करोड़ के निवेश की पहचान की गई है। यह आंकड़ा जांच के आगे बढ़ने के साथ बदल सकता है, क्योंकि पुलिस अभी यूजर्स के डेटा, बैंक खातों और लेनदेन का मिलान कर रही है। खासतौर पर उन लोगों की पहचान की जा रही है जिन्होंने ऐप के जरिए पैसा लगाया या रेफरल सिस्टम में हिस्सा लिया।

डेढ़ साल में ₹635 करोड़ के लेनदेन पर पुलिस की नजर

पुलिस ने पाया कि आरोपियों से जुड़े कई बैंक खाते पिछले एक से डेढ़ साल के भीतर खोले गए थे। जांच के मुताबिक आरोपियों का कोई अन्य ज्ञात वैध कारोबार या रोजगार सामने नहीं आया है, लेकिन इन खातों में इसी अवधि में करीब ₹635 करोड़ के लेनदेन दर्ज हुए। अब जांच एजेंसियां इन पैसों के स्रोत और उनकी वैधता की पड़ताल कर रही हैं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि आरोपियों ने आयकर, GST और अन्य लागू कर नियमों का पालन किया था या नहीं। अगर आरोपी इतनी बड़ी रकम के वैध स्रोत और संबंधित कारोबार का संतोषजनक रिकॉर्ड नहीं दे पाते हैं, तो उन्हें आगे अतिरिक्त कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। मामले की पूरी तस्वीर SIT की जांच, बैंकिंग रिकॉर्ड और ऐप से जुड़े यूजर्स के डेटा के विश्लेषण के बाद और स्पष्ट होगी।

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