September 15, 2026

Haryana Milk Price: सिरसा में फेट के हिसाब से तय हो दूध का सरकारी रेट, 19 को महापंचायत

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Haryana Milk Price: सिरसा में फेट के हिसाब से तय हो दूध का सरकारी रेट, 19 को महापंचायत

सिरसा में फेट के हिसाब से तय हो दूध का सरकारी रेट, 19 को महापंचायत

Haryana Milk Price: हरियाणा के सिरसा जिले में दूध के रेट और मिलावटखोरी को लेकर किसानों और पशुपालकों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। बाजार में धड़ल्ले से बिक रहे नकली दूध, सिंथेटिक मावा, खोया और मिलावटी दुग्ध उत्पादों से नाराज पशुपालक अब गांव-गांव जाकर लामबंदी कर रहे हैं।

पशुपालकों का साफ कहना है कि सरकार एक तरफ तो नकली दूध के काले कारोबार पर नकेल कसे और दूसरी तरफ असली व शुद्ध दूध के सरकारी रेट बढ़ाए, ताकि पशुपालकों को उनकी मेहनत का पूरा मोल मिल सके।

इस मुहिम को धार देने के लिए गांव मंगाला स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा बाबा भूमन शाह में आसपास के कई गांवों के किसानों और पशुपालकों की एक अहम बैठक आयोजित की गई। मंगाला, ढाणी काहन सिंह, टीटू खेड़ा और सलारपुर के ग्रामीणों ने एक सुर में कहा कि मिलावटी सामान न केवल पशुपालकों की कमर तोड़ रहा है, बल्कि आम जनता की सेहत के साथ भी खिलवाड़ कर रहा है। किसानों ने बताया कि वे इस संबंध में जिला प्रशासन के जरिए मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी सौंप चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई न होने के कारण अब वे राज्यस्तरीय आंदोलन खड़ा करने को मजबूर हैं।

फेट के आधार पर तय हों दाम: भैंस के दूध के ₹100 और देसी गाय के ₹80 प्रति लीटर की मांग

बैठक में मौजूद पशुपालकों ने डेयरी प्लांटों और सरकार की नीतियों पर जमकर भड़ास निकाली। किसानों का तर्क है कि यदि सरकार दूध की फेट (FAT) के न्यूनतम रेट तय कर दे, तो बाजार में दूध की खरीद-बिक्री में पारदर्शिता आएगी। फिलहाल कोई व्यापारी मनमाने दाम पर दूध खरीदता है तो कोई पशुपालकों का शोषण करता है। पशुपालकों ने मांग रखी है कि गुणवत्ता के हिसाब से रेट तय किए जाने चाहिए—भैंस का शुद्ध दूध 100 रुपये प्रति लीटर और देसी, राठी व साहीवाल नस्ल की गायों का दूध 80 रुपये प्रति लीटर बिकना चाहिए।

किसानों ने यह व्यावहारिक बात भी रखी कि सभी गायों का दूध एक समान फेट का नहीं होता। जिन गायों का दूध पतला या कम फेट वाला होता है, उनका रेट उसी गुणवत्ता के हिसाब से तय होना चाहिए ताकि आम उपभोक्ता और उत्पादक दोनों को नुकसान न हो। उनका कहना है कि अगर नकली दूध पूरी तरह बंद हो जाए, तो शुद्ध दूध की मांग अपने आप बढ़ेगी और पशुपालकों को उनका हक मिलने लगेगा।

19 सितंबर को चिल्ला साहिब में महामंथन: मुख्यमंत्री से मिलेगा राज्यस्तरीय प्रतिनिधिमंडल

आंदोलन की आगे की रूपरेखा साझा करते हुए किसान नेता मैक्स साहूवाला ने बताया कि इस लड़ाई को अब पूरे सिरसा जिले में फैलाया जा रहा है। इसी सिलसिले में आगामी 19 सितंबर को सिरसा के ऐतिहासिक गुरुद्वारा चिल्ला साहिब में एक बड़ी जिला स्तरीय बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में दुग्ध व्यवसाय से जुड़े तकनीकी विशेषज्ञों और डेयरी साइंटिस्टों को भी आमंत्रित किया गया है, जो दूध की शुद्धता मापने और लागत तय करने के तकनीकी पहलुओं पर विचार रखेंगे।

19 सितंबर की बैठक के बाद एक मजबूत राज्यस्तरीय कमेटी का गठन किया जाएगा, जो सीधे चंडीगढ़ जाकर मुख्यमंत्री से मुलाकात करेगी और अपनी मांगें रखेगी। पशुपालकों का कहना है कि जब तक सरकार नकली दूध के सिंथेटिक नेटवर्क को ध्वस्त कर असली दूध का समर्थन मूल्य तय नहीं करती, तब तक गांव से लेकर प्रदेश स्तर तक यह संघर्ष जारी रहेगा।

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