September 15, 2026

Narnaul : नीरपुर गांव के लाल ने एक बार फिर बढ़ाया देश का मान, इंजीनियर आलोक यादव ने गूगल क्रोम में ढूंढा बग, जीता 1 हजार अमेरिकी डॉलर का इनाम

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Narnaul : नीरपुर गांव के लाल ने एक बार फिर बढ़ाया देश का मान, इंजीनियर आलोक यादव ने गूगल क्रोम में ढूंढा बग, जीता 1 हजार अमेरिकी डॉलर का इनाम

सॉफ्टवेयर इंजीनियर आलोक यादव

Narnaul : हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के नीरपुर गांव के रहने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर आलोक यादव ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश और अपने जिले का नाम रोशन किया है।

 

 

आलोक ने गूगल के लोकप्रिय ब्राउजर ‘गूगल क्रोम’ में एक गंभीर बग (तकनीकी खामी) ढूंढ निकाला है। उनकी इस शानदार खोज के लिए गूगल ने उन्हें 1 हजार अमेरिकन डॉलर (लगभग 1 लाख रुपये) का नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया है। यह राशि उनके बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी गई है।

 

 

पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर (गो-लैंग्वेज डेवलपर) आलोक यादव शौकिया तौर पर एक बग स्पेशलिस्ट भी हैं। बीटेक की पढ़ाई के दौरान से ही उन्हें तकनीकी सुरक्षा और कोडिंग में कमियां तलाशने का शौक रहा है, ताकि इंटरनेट और ब्राउजर्स को आम यूजर्स के लिए पूरी तरह सुरक्षित बनाया जा सके।

 

 

 

पहले भी जीत चुके हैं 5 हजार अमेरिकन डॉलर

आलोक की इस उपलब्धि से उनके परिवार और क्षेत्र में खुशी का माहौल है। उनकी पत्नी भावना यादव ने बताया कि आलोक ने इससे पहले 2017-18 के दौरान भी गूगल क्रोम में एक बेहद खतरनाक बग ढूंढा था। उस समय गूगल ने उस खामी को बेहद गंभीर मानते हुए 2019 में उन्हें 5 हजार अमेरिकन डॉलर (करीब पौने चार लाख रुपये) का भारी-भरकम इनाम दिया था।

 

 

इस तरह आलोक अब तक गूगल से कुल 6 हजार अमेरिकन डॉलर के पुरस्कार जीत चुके हैं। खास बात यह है कि उनके द्वारा रिपोर्ट किए गए कुछ अन्य बग्स पर अभी गूगल की तकनीकी टीम का फैसला आना बाकी है। गूगल क्रोम के अलावा उन्होंने कई अन्य पॉपुलर ऐप्स और वेबसाइटों में भी बग ढूंढकर उन्हें ठीक करवाने में अहम भूमिका निभाई है।

 

 

 

आलोक यादव ने अपनी शुरुआती पढ़ाई नीरपुर के एसवीएन स्कूल (नॉन-मेडिकल) से पूरी की। इसके बाद जेईई (JEE) मेंस की परीक्षा पास करने के बाद उन्होंने जालंधर से कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने बतौर ट्रेनी इंजीनियर टीसीएस (TCS) कंपनी से अपने करियर की शुरुआत की थी।

 

 

आलोक का ताल्लुक एक प्रतिष्ठित साहित्यिक और सामाजिक परिवार से है। उनके पिता रघुविंद्र यादव क्षेत्र के जाने-माने दोहाकार और वरिष्ठ साहित्यकार हैं, जबकि उनकी माता शील यादव एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं। इसके अलावा वे डॉक्टर अलका यादव के भाई हैं। उनकी इस सफलता पर पूरे इलाके में गर्व महसूस किया जा रहा है।

 

 

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