Kurukshetra News: मंडियों में धान की आवक शुरू लेकिन पोर्टल ठप, भड़के किसानों ने दी आंदोलन की चेतावनी

मंडियों में धान की आवक शुरू लेकिन पोर्टल ठप, भड़के किसानों ने दी आंदोलन की चेतावनी
Kurukshetra News: धान (जीरी) की सरकारी खरीद को लेकर हरियाणा की सियासत और मंडियों में पारा चढ़ गया है। 15 सितंबर से सरकारी खरीद शुरू कराने की मियाद खत्म होने के बाद अब भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) ने मोर्चा खोल दिया है। कुरुक्षेत्र जिले की प्रसिद्ध शाहाबाद अनाज मंडी में आज किसान यूनियन ने आपात बैठक बुलाई है। मंडियों में धान की आवक तेजी से शुरू हो चुकी है, लेकिन सरकारी खरीद न होने से गुस्साए किसान आज दिल्ली-अमृतसर नेशनल हाईवे (GT Road) चक्का जाम करने की रणनीति पर मुहर लगा सकते हैं।
“पोर्टल बंद, मिलर्स गायब”—चढ़ूनी का सरकार पर तीखा प्रहार
भाकियू अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने सरकार की नीयत पर सीधा सवाल खड़ा करते हुए कहा कि बार-बार चेतावनी देने के बावजूद शासन ने खरीद की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की। चढ़ूनी के मुताबिक, मंडियों में फसल पहुंच रही है लेकिन मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर वेरिफिकेशन का काम ठप पड़ा है। किसी भी राइस मिलर का अब तक रजिस्ट्रेशन नहीं कराया गया है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार वाकई किसानों के हित में खरीद शुरू करना चाहती, तो पोर्टल से लेकर राइस मिलिंग की एनओसी तक का कागजी काम पहले ही पूरा कर लिया जाता।
नमी की सीमा 20% करने की मांग, पिहोवा महापंचायत से जारी हुआ था अल्टीमेटम
धान खरीद की समयसीमा को लेकर किसान संगठन लंबे समय से दबाव बना रहे हैं। इससे पहले 10 सितंबर को पिहोवा अनाज मंडी में संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के बैनर तले आयोजित महापंचायत में स्पष्ट चेतावनी दी गई थी। भाकियू पिहोवा के प्रवक्ता प्रिंस वड़ैच ने बताया कि सीजन की शुरुआत में धान में प्राकृतिक नमी ज्यादा होती है। किसान मांग कर रहे हैं कि नमी का मापदंड 17 फीसदी से बढ़ाकर 20 फीसदी किया जाए ताकि मंडियों में किसानों को कटाई और उठान के नाम पर प्रताड़ित न किया जाए।
‘जल्दबाजी न करें किसान’—कृषि मंत्री की अपील बनाम पिछले साल का इतिहास
दूसरी ओर, विवाद के बीच कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने कुरुक्षेत्र में भाजपा दफ्तर से किसानों से धैर्य रखने की अपील की है। मंत्री ने कहा कि किसान पूरी तरह पकी फसल ही मंडी में लाएं क्योंकि 17 प्रतिशत से अधिक नमी होने पर चावल की गुणवत्ता प्रभावित होती है और मिलिंग प्रक्रिया में दिक्कत आती है। गौरतलब है कि बीते वर्ष 2025 में भी सरकार ने 1 अक्टूबर से खरीद का शेड्यूल बनाया था, लेकिन किसानों के तीखे विरोध प्रदर्शनों के बाद सरकार को घुटने टेकते हुए 22 सितंबर से ही सरकारी कांटे खोलने पड़े थे।
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