चंडीगढ़ में साइबर ठगी: CBI अफसर बनकर डराया, रिटायर SBI अधिकारी से 29.80 लाख ट्रांसफर कराए
चंडीगढ़ में साइबर ठगी
Chandigarh Cyber Fraud: चंडीगढ़ के सेक्टर-22बी में रहने वाले SBI के रिटायर अधिकारी श्रीपाल जैन को 9 सितंबर 2026 को अनजान नंबर से WhatsApp कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को CBI अधिकारी बताते हुए कहा कि एक संजीव नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है और उसके पास से एक करोड़ रुपए बरामद हुए हैं। आरोपी ने श्रीपाल जैन से कहा कि पूछताछ के दौरान संजीव के संपर्क में उनका नाम सामने आया है। इसके बाद उन्हें बताया गया कि उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है और वह किसी भी तरह भागने की कोशिश न करें। शिकायत के मुताबिक, कॉल करने वाले ने श्रीपाल जैन को किसी दूसरे व्यक्ति से इस बारे में बात करने से भी मना किया। उन्हें यह भी कहा गया कि उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
परिवार को गिरफ्तार करने की धमकी देकर डराया
श्रीपाल जैन ने आरोपी से कहा कि वह संजीव नाम के किसी व्यक्ति को नहीं जानते और उनका किसी गैरकानूनी गतिविधि से कोई संबंध नहीं है। उनका कहना था कि उन्हें जानबूझकर मामले में फंसाया जा रहा है। इसके बाद आरोपी ने उन्हें कथित तौर पर भरोसा दिलाया कि अगर वह इस मामले से बचना चाहते हैं तो बताए गए बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करनी होगी। आरोपियों ने यह भी कहा कि पैसे जमा करने के बाद उनका मामला बंद किया जा सकता है। शिकायत में श्रीपाल जैन ने बताया कि आरोपी ने उन्हें परिवार को लेकर भी डराया। उन्हें धमकी दी गई कि अगर उन्होंने किसी को इस बारे में बताया तो उनके परिवार के सदस्यों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। श्रीपाल जैन के दो बेटे और एक बेटी हैं। परिवार की गिरफ्तारी की धमकी से वह डर गए और आरोपियों के निर्देशों का पालन करने लगे।
आरोपियों ने WhatsApp पर श्रीपाल जैन को बैंक खाते की जानकारी भेजी और उसमें 22 लाख रुपए RTGS करने को कहा। गिरफ्तारी के डर के कारण उन्होंने रकम बताए गए खाते में ट्रांसफर कर दी। इसके बाद भी आरोपियों की मांग जारी रही। अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए श्रीपाल जैन से और रकम ट्रांसफर कराई गई। इस तरह कुल 29 लाख 80 हजार रुपए आरोपियों के बताए बैंक खातों में पहुंच गए। रकम ट्रांसफर होने के बाद भी ठगों ने श्रीपाल जैन को राहत नहीं दी। उलटे उनसे 10 लाख रुपए और जमा करने को कहा गया। आरोपियों ने कथित तौर पर कहा कि यह रकम जमा करने के बाद उनका केस बंद कर दिया जाएगा।
29.80 लाख के बाद भी 10 लाख और मांगे
शिकायत के अनुसार, जब आरोपी ने 10 लाख रुपए और मांगे तो श्रीपाल जैन ने बताया कि उनके पास अब पैसे नहीं बचे हैं। उन्होंने अपनी जमा पूंजी की रकम ट्रांसफर कर दी थी। इसके बावजूद आरोपी कथित तौर पर गिरफ्तारी की धमकी देता रहा। इसके बाद श्रीपाल जैन ने फोन काट दिया। कुछ समय तक परेशान रहने के बाद उन्होंने अपने बेटे को पूरी घटना की जानकारी दी। बेटे ने पिता से बातचीत के बारे में जानकारी ली और रकम ट्रांसफर होने की बात सुनी। इसके बाद उसे साइबर ठगी का शक हुआ। वह अपने पिता को साथ लेकर पुलिस के पास पहुंचा और पूरी घटना की शिकायत दर्ज कराई।
श्रीपाल जैन की शिकायत पर साइबर क्राइम थाना पुलिस ने FIR नंबर 156 दर्ज की है। मामले में IT Act की धारा 66-C और 66-D के साथ BNS की धारा 308(2), 318(4), 319(2), 336(3), 338, 340(2) और 61(2) के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस अब ठगी में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों और WhatsApp कॉल की जानकारी खंगाल रही है। इसके साथ ही जिन बैंक खातों में रकम ट्रांसफर की गई, उनकी भी जांच की जा रही है। जांच में पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि 29.80 लाख रुपए किन-किन खातों में पहुंचे, इन खातों का इस्तेमाल कौन कर रहा था और ठगी की पूरी वारदात में कितने लोग शामिल हैं। डिजिटल ट्रांजैक्शन और कॉल से जुड़े रिकॉर्ड भी जांच का हिस्सा हैं।
CBI और गिरफ्तारी के नाम पर ऐसे डराया
इस मामले में ठगों ने पहले सरकारी जांच एजेंसी का अधिकारी होने का दावा किया। इसके बाद मनी लॉन्ड्रिंग केस, गिरफ्तारी वारंट और एक करोड़ रुपए की बरामदगी जैसी बातें बताकर पीड़ित को कानूनी कार्रवाई का डर दिखाया गया। डर बढ़ाने के लिए परिवार के सदस्यों की गिरफ्तारी की धमकी भी दी गई। इसके बाद पैसे ट्रांसफर करने को कथित तौर पर मामले से बचने और केस बंद कराने के रास्ते के तौर पर पेश किया गया। श्रीपाल जैन के मामले में ठगी का सिलसिला तब तक चलता रहा, जब तक आरोपियों ने उनसे 10 लाख रुपए और नहीं मांग लिए। इसी मांग के बाद उन्होंने अपने बेटे को जानकारी दी और मामला पुलिस तक पहुंचा। पुलिस की जांच अब बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, WhatsApp कॉल और रकम के ट्रांजैक्शन के जरिए ठगी के पूरे नेटवर्क तक पहुंचने पर केंद्रित है। फिलहाल मामले में जांच जारी है।
