Brij Bhushan Case: बृजभूषण शरण सिंह को क्लीन चिट के खिलाफ फिर कोर्ट पहुंचीं 4 महिला पहलवान, फैसले पर उठाए सवाल
बृजभूषण शरण सिंह को क्लीन चिट के खिलाफ फिर कोर्ट पहुंचीं 4 महिला पहलवान, फैसले पर उठाए सवाल
Brij Bhushan Case: भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI Sexual Harassment Case) के पूर्व अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता बृजभूषण शरण सिंह (Brij Bhushan Acquittal Challenged) की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती दिख रही हैं। यौन उत्पीड़न मामले में निचली अदालत से मिले ‘क्लीन चिट’ के खिलाफ चार महिला पहलवानों ने फिर से अदालत का दरवाजा खटखटाया है। पहलवानों ने दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट (विशेष अदालत) में याचिका दाखिल कर एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACJM) के 3 अगस्त 2026 के बरी करने वाले आदेश को खारिज करने की मांग की है।
‘फैसले में पीड़िताओं से आदर्श व्यवहार की उम्मीद करना गैर-वाजिब’
महिला पहलवानों ने अपनी अपील में निचली अदालत के फैसले पर कड़े सवाल उठाए हैं। याचिका में कहा गया है कि निचली अदालत का निर्णय कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है क्योंकि इसमें उपलब्ध साक्ष्यों का निष्पक्ष आकलन करने के बजाय अनुमानों और अटकलों को तरजीह दी गई।
पहलवानों का तर्क है कि फैसले में इस पुरानी और रूढ़िवादी धारणा को आधार बनाया गया कि यौन उत्पीड़न की शिकार किसी महिला को घटना के बाद कैसा आचरण या व्यवहार करना चाहिए। उनका कहना है कि उत्पीड़न झेलने वाली महिलाओं की परिस्थितियों और मानसिक दबाव को समझे बिना साक्ष्यों को खारिज किया गया।
निचली अदालत ने बयानों के विरोधाभास और मधुर संबंधों को बनाया था आधार
उल्लेखनीय है कि 3 अगस्त 2026 को एसीजेएम कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह और तत्कालीन (Vinod Tomar WFI) सहायक सचिव विनोद तोमर को आईपीसी की धारा 354 (महिला की गरिमा भंग करना), 354A (यौन उत्पीड़न) और 506 (आपराधिक धमकी) के आरोपों से बरी कर दिया था। अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि अभियोजन पक्ष आरोपों को ‘उचित संदेह से परे’ साबित करने में नाकाम रहा।
अदालत ने अपने आदेश में पीड़िताओं की लंबी चुप्पी, घटना के वर्षों बाद शिकायत दर्ज कराने, बयानों में अंतर और आरोपी के साथ लगातार बने पारिवारिक व मधुर संबंधों का हवाला दिया था। जज ने टिप्पणी की थी कि करियर के नुकसान का डर समझ में आता है, लेकिन इसके बावजूद वर्षों तक आरोपी के पारिवारिक आयोजनों और शादियों में शामिल होना समझ से परे है।
26 सितंबर को हो सकती है सुनवाई
संभावित रूप से राउज एवेन्यू कोर्ट में 26 सितंबर को इस अपील पर पहली सुनवाई हो सकती है। पीड़ित महिला पहलवानों ने 2016 से 2019 के बीच WFI दफ्तर, बृजभूषण सिंह के आधिकारिक आवास और विदेशी दौरों के दौरान यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे। (Wrestlers Protest Court Update निचली अदालत से राहत मिलने के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने अयोध्या में भव्य रैली निकाली थी। अब देखना होगा कि उच्च अदालत महिला पहलवानों की इस अपील पर क्या रुख अपनाती है।
यह भी पढ़ें– Suruchi Phogat Gold: एशियन रिकॉर्ड के साथ झज्जर की बेटी का कमाल! 10 मीटर एयर पिस्टल में भारत ने जीता गोल्ड
