Kurukshetra Crocodile Rescue: कुरुक्षेत्र में SYL नहर में फंसा 50 किलो का मगरमच्छ, गोताखोर प्रगट सिंह की टीम ने ऐसे बचाया
कुरुक्षेत्र में SYL नहर में फंसा 50 किलो का मगरमच्छ, गोताखोर प्रगट सिंह की टीम ने ऐसे बचाया
Kurukshetra Crocodile Rescue: (पवन शर्मा) धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र के दबखेड़ी गांव के समीप बहती सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर में शुक्रवार को उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब मछली पकड़ने के लिए डाले गए जाल में एक विशालकाय मगरमच्छ आ फंसा। करीब 4 फीट लंबे और 50 किलोग्राम वजनी इस मगरमच्छ के जाल में उलझने से मजदूर सहम गए।
गनीमत यह रही कि समय रहते कुरुक्षेत्र के मशहूर गोताखोर प्रगट सिंह की टीम को इसकी इत्तला दे दी गई, जिसने मौके पर पहुंचकर मगरमच्छ को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
मछली पकड़ते वक्त जाल में फंसा मगरमच्छ
जानकारी के मुताबिक, करनाल निवासी ठेकेदार भगवान सिंह की लेबर दबखेड़ी के पास एसवाईएल नहर में मछली पकड़ने का काम कर रही थी। रोजमर्रा की तरह जब मजदूरों ने नहर में बिछाए गए जाल को बाहर खींचना शुरू किया, तो उन्हें काफी भारीपन महसूस हुआ। जब जाल किनारे के करीब आया तो उसमें मछली की जगह एक बड़ा मगरमच्छ छटपटाता दिखा।
खतरे को भांपते हुए ठेकेदार ने तुरंत कुरुक्षेत्र के जाने-माने गोताखोर प्रगट सिंह से संपर्क साधा और मदद मांगी।
टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित निकाला बाहर
सूचना मिलते ही गोताखोर प्रगट सिंह अपने साथी गुरुजी, मामू, सुरेंद्र, प्रवीण और बलविंदर सिंह को साथ लेकर बिना देरी किए घटनास्थल पर पहुंचे। नहर के किनारे उलझे जाल से मगरमच्छ को सुरक्षित निकालना आसान नहीं था, क्योंकि जरा सी चूक से मगरमच्छ हमला कर सकता था या खुद चोटिल हो सकता था। टीम ने सूझबूझ का परिचय देते हुए काफी देर की मशक्कत के बाद मगरमच्छ को बिना कोई नुकसान पहुंचाए जाल से बाहर निकाल लिया।
वन्य प्राणी विभाग को सौंपा, भौर सैंदा में छोड़ा गया
मगरमच्छ का सफल रेस्क्यू करने के बाद इसकी जानकारी तुरंत वन्य प्राणी विभाग को दी गई। सूचना मिलते ही विभाग के कर्मचारी सुभाष और कृष्णा मौके पर पहुंचे। विभागीय अधिकारियों ने मगरमच्छ को अपनी सुपुर्दगी में लिया और कुरुक्षेत्र के ऐतिहासिक भौर सैंदा स्थित मगरमच्छ प्रजनन केंद्र (Crocodile Breeding Centre) ले जाकर उसे सुरक्षित पानी में छोड़ दिया।
समय रहते गोताखोर टीम की मुस्तैदी और वाइल्डलाइफ टीम की तत्परता से एक बड़ा हादसा होने से टल गया और मगरमच्छ को भी नया जीवन मिल गया।
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