Diksha Dagar Golf: झज्जर की दीक्षा डागर ने एशियन गेम्स में रचा इतिहास, महिला गोल्फ टीम ने जीता सिल्वर मेडल
झज्जर की दीक्षा डागर ने एशियन गेम्स में रचा इतिहास, महिला गोल्फ टीम ने जीता सिल्वर मेडल
Diksha Dagar Golf: हरियाणा की माटी और खेलों का नाता सदियों पुराना है। मुक्केबाजी के रिंग से लेकर कुश्ती के अखाड़े तक और अब गोल्फ के हरे-भरे मैदानों तक, प्रदेश के एथलीट हर जगह अपनी अमिट छाप छोड़ रहे हैं। इस सफलता के पीछे एथलीटों का अटूट आत्मविश्वास तो होता ही है, साथ ही उनके परिवारों का समर्पण भी अहम भूमिका निभाता है। इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए जापान के आइची-नागोया में खेले जा रहे एशियन गेम्स 2026 से देश के लिए एक बेहद खुश करने वाली खबर आई है।
झज्जर जिले की होनहार गोल्फर दीक्षा डागर ने भारतीय महिला गोल्फ टीम के साथ मिलकर नया इतिहास रच दिया है। महिला टीम स्पर्धा में दीक्षा डागर, प्रणवी उर्स और अदिति अशोक की तिकड़ी ने असाधारण खेल का प्रदर्शन करते हुए भारत के खाते में रजत पदक डाल दिया। भारतीय टीम ने पूरे टूर्नामेंट में जबरदस्त निरंतरता दिखाते हुए 14 अंडर पार के साथ कुल 546 का स्कोर बनाया और पोडियम पर दूसरा स्थान हासिल किया।
सुनने में थी तकलीफ, लेकिन जज्बे के आगे छोटी पड़ गई हर मुश्किल
दीक्षा डागर की यह स्वर्णिम सफलता केवल एक पदक जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संघर्ष और अडिग इरादों की एक मिसाल भी है। झज्जर जिले के गांव छापर में जन्मी दीक्षा बचपन से ही सुनने में असमर्थ (हियरिंग इम्पेयरमेंट) रही हैं। साधारण परिवारों में ऐसी शारीरिक चुनौतियों को अक्सर नियति मान लिया जाता है, लेकिन दीक्षा और उनके परिवार ने इसे कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।
दीक्षा के खेल करियर में उनके पिता कर्नल नरेंद्र डागर की भूमिका किसी द्रोणाचार्य से कम नहीं रही। पूर्व आर्मी अफसर पिता ने न केवल बेटी का हौसला बढ़ाया, बल्कि गोल्फ जैसे खर्चीले और तकनीकी खेल में उसकी राह हर कदम पर आसान की।
छोटे टूर्नामेंट्स से इंटरनेशनल गोल्फ तक का सफर
बहुत ही छोटी उम्र में दीक्षा ने गोल्फ स्टिक थाम ली थी। पिता की देखरेख में उन्होंने खेल की बारीकियों को समझना शुरू किया और दिन-रात कड़ी मेहनत की। स्थानीय व राष्ट्रीय स्तर के जूनियर टूर्नामेंट्स से शुरू हुआ उनका यह सफर धीरे-धीरे लेडीज यूरोपियन टूर और ओलंपिक्स से होता हुआ आज एशियन गेम्स में तिरंगा लहराने तक पहुंच चुका है।
एशियन गेम्स 2026 में मिली यह ऐतिहासिक जीत उन तमाम युवाओं और विशेष रूप से दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए एक नई किरण बनकर सामने आई है, जो सुख-सुविधाओं और अनुकूल परिस्थितियों के मोहताज नहीं होते। दीक्षा डागर की इस उपलब्धि से पूरे झज्जर जिले में जश्न का माहौल है और खेल प्रेमी देश भर से उन्हें बधाइयां भेज रहे हैं।
