Narnaul: जमानतदार बनना कानूनी जिम्मेदारी, शर्तें समझें और न्यायालय के निर्देशों का करें पालन
Oplus_16908322
Narnaul:
किसी की जमानत देना केवल कागज पर हस्ताक्षर करना नहीं, बल्कि एक कानूनी जिम्मेदारी स्वीकार करना है।
पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार ने आमजन से अपील की है कि किसी व्यक्ति के जमानतदार बनने से पहले संबंधित शर्तों और अपनी जिम्मेदारी को अच्छी तरह समझ लें। शर्तों का उल्लंघन होने पर जमानतदार को भी आर्थिक और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने बताया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 491 में बंधपत्र की शर्तें टूटने पर कार्रवाई की प्रक्रिया दी गई है। बंधपत्र यानी न्यायालय में दिया गया लिखित वचन, जिसमें तय शर्तों का पालन करने की जिम्मेदारी ली जाती है। इनमें निर्धारित तारीख पर न्यायालय में उपस्थित होना या किसी संपत्ति को न्यायालय के सामने पेश करना जैसी शर्तें शामिल हो सकती हैं।
यदि न्यायालय में यह साबित हो जाए कि शर्तों का उल्लंघन होने के कारण बंधपत्र जब्त हो गया है, तो न्यायालय इसके कारण दर्ज करेगा। इसके बाद संबंधित व्यक्ति से बंधपत्र में तय दंड राशि जमा करने या यह बताने के लिए कहा जा सकता है कि उससे यह राशि क्यों न ली जाए। पर्याप्त कारण नहीं बताने और राशि जमा नहीं करने पर न्यायालय उसकी वसूली जुर्माने की तरह कर सकता है।
यदि जमानतदार दंड राशि का भुगतान नहीं करता और कानूनी प्रक्रिया से उसकी वसूली भी नहीं हो पाती, तो न्यायालय उसे अधिकतम छह माह तक सिविल जेल में रखने का आदेश दे सकता है। केवल शर्त टूटते ही जमानतदार को जेल भेजने का प्रावधान नहीं है; इसके लिए कानून में निर्धारित प्रक्रिया और न्यायालय का आदेश आवश्यक है।
पुलिस अधीक्षक ने अपील की कि जमानत संबंधी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने से पहले उन्हें ध्यान से पढ़ें। कोई शर्त समझ में न आए तो उसकी जानकारी लें। न्यायालय की तारीख और नोटिस की अनदेखी न करें।
उपस्थित होने में कोई वास्तविक परेशानी हो तो उचित माध्यम से समय पर न्यायालय को अवगत कराएं। कानूनी जिम्मेदारियों की सही जानकारी और समय पर उठाया गया कदम अनावश्यक परेशानी से बचा सकता है।
