Stubble Management Haryana: पराली जलाने का झंझट खत्म! HAU के बायो डी-कंपोजर से पराली का पक्का इलाज, खेत में ही बन जाएगी खाद
पराली जलाने का झंझट खत्म! HAU के बायो डी-कंपोजर से पराली का पक्का इलाज, खेत में ही बन जाएगी खादStubble Management Haryana: पराली जलाने का झंझट खत्म! HAU के बायो डी-कंपोजर से पराली का पक्का इलाज, खेत में ही बन जाएगी खाद
Stubble Management Haryana: धान की कटाई के बाद खेतों में खड़े अवशेष यानी पराली को संभालना हर साल किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होता है। प्राकृतिक रूप से पराली को गलने में काफी वक्त लगता है, जबकि गेहूं और अन्य रबी फसलों की बुवाई के लिए किसानों के पास खेत तैयार करने का समय बेहद सीमित होता है। वक्त बचाने की इसी जल्दबाजी में अक्सर किसान पराली को आग लगा देते हैं, जिससे न केवल आबो-हवा जहरीली होती है, बल्कि खेत की उपजाऊ शक्ति को भी भारी नुकसान पहुंचता है।
इस समस्या का स्थायी और पर्यावरण-अनुकूल समाधान निकालते हुए चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय ( HAU Hisar paddy stubble management), हिसार के वैज्ञानिकों ने ‘एचएयू बायो डी-कंपोजर’ तैयार किया है। विश्वविद्यालय का दावा है कि यह बायोलॉजिकल उत्पाद खेत में ही पराली को प्राकृतिक तरीके से विघटित (गलाने) की प्रक्रिया को बेहद तेज कर देता है।
सूक्ष्मजीव करेंगे कमाल: जलाने की जरूरत नहीं, मिट्टी में ही मिलेगी पराली
HAU के वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बायो डी-कंपोजर में खास किस्म के लाभकारी सूक्ष्मजीव (Beneficial Microorganisms) मौजूद हैं। जब किसान धान की कटाई के बाद बचे अवशेषों पर इसका छिड़काव कर खेत की जुताई करते हैं, तो ये सूक्ष्मजीव पराली को तेजी से सड़ाने का काम शुरू कर देते हैं।
इसके इस्तेमाल से किसानों को पराली जलाने या उसे खेत से बाहर निकालने के लिए भारी-भरकम खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। किसान बहुत ही कम समय और लागत में अपने खेत को अगली फसल की बिजाई के लिए पूरी तरह तैयार कर सकते हैं।
मिट्टी की सेहत सुधरेगी, बचेंगे मित्र कीट और पोषक तत्व
विश्वविद्यालय के मृदा विशेषज्ञों का मानना है कि पराली (Chaudhary Charan Singh Haryana Agricultural University) जलाने से जमीन की ऊपरी सतह में मौजूद जैविक कार्बन, नाइट्रोजन, फास्फोरस जैसे आवश्यक पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं और मिट्टी के मित्र कीड़े जलकर मर जाते हैं। इसके उलट, जब बायो डी-कंपोजर के जरिए पराली खेत में ही गलती है, तो वह एक बेहतरीन जैविक खाद का रूप ले लेती है।
इससे जमीन की जल धारण क्षमता बढ़ती है, मिट्टी का जैविक ढांचा मजबूत होता है और अगली फसल को अतिरिक्त पोषक तत्व प्राप्त होते हैं। एक तरह से यह चक्र मिट्टी के स्वास्थ्य को लंबे समय तक बेहतर बनाए रखने में मददगार साबित होता है।
कृषि मेले में पहली बार हुआ पेश, किसानों में दिखा भारी उत्साह
एचएयू में हाल ही में आयोजित कृषि मेले के दौरान इस ‘बायो डी-कंपोजर’ को पहली बार आम किसानों के लिए प्रदर्शित और उपलब्ध कराया गया। (HAU Krishi Mela bio decomposer) मेले में आए किसानों को वैज्ञानिकों ने इसके इस्तेमाल का तरीका और इससे होने वाले दूरगामी लाभों के बारे में विस्तार से समझाया।
पहली ही बार में इस उत्पाद को लेकर किसानों के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। मेले में पहुंचे सैकड़ों किसानों ने पराली प्रबंधन के इस सस्ते और जैविक विकल्प को हाथों-हाथ खरीदा। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इस तकनीक के व्यापक इस्तेमाल से इस सीजन में पराली जलाने की घटनाओं में काफी कमी आएगी।
