रैलियां बंद, धड़कनें तेज: अंबाला निकाय चुनाव में 1.98 लाख मतदाता करेंगे फैसला
May 09, 2026 4:57 PM
अंबाला। चार महीने की देरी और 10 दिनों के भीषण चुनावी शोर के बाद अंबाला नगर निगम चुनाव अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। शुक्रवार शाम 6 बजे बजते ही शहर की फिजाओं से लाउडस्पीकरों की गूंज गायब हो गई और रैलियों का रेला थम गया। चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक, अब कोई भी प्रत्याशी शक्ति प्रदर्शन या बड़ी सभा नहीं कर पाएगा। शनिवार का दिन पूरी तरह 'साइलेंट मोड' में रहेगा, जिसमें प्रत्याशी मतदाताओं की चौखट पर व्यक्तिगत दस्तक देकर समर्थन जुटाएंगे।
प्रशासन की चुप्पी और शहर में 'पोस्टर वॉर'
इस चुनाव में एक अजीबोगरीब स्थिति देखने को मिली। आमतौर पर प्रशासन चुनावी पोस्टर, होर्डिंग और रैलियों के लिए आधिकारिक स्थलों की सूची जारी करता है, लेकिन इस बार ऐसी किसी सूचना का अभाव रहा। इतना ही नहीं, सुरक्षा के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण 'संवेदनशील' और 'अतिसंवेदनशील' बूथों की जानकारी भी सार्वजनिक तौर पर साझा नहीं की गई। प्रशासनिक स्पष्टता की कमी का नतीजा यह रहा कि शहर की दीवारें बेतरतीब पोस्टरों से पट गईं और पूरे चुनाव में मुद्दों से ज्यादा 'पोस्टर वॉर' हावी रहा।
1.98 लाख मतदाता और मेयर पद की त्रिकोणीय जंग
नगर निगम के 20 वार्डों का गणित इस बार करीब 2 लाख मतदाताओं के हाथ में है। आंकड़ों के लिहाज से 1,02,654 पुरुष और 95,550 महिला मतदाता रविवार सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। मेयर की कुर्सी के लिए मुख्य मुकाबला भाजपा की अक्षिता, कांग्रेस की कुलविंद्र कौर और निर्दलीय प्रत्याशी सोनिया चौधरी के बीच माना जा रहा है। 13 अप्रैल को बिगुल बजने के बाद शुरू हुई यह सियासी बिसात अब 13 मई को नतीजों के साथ मुकम्मल होगी।
बढ़ी धड़कनें: शंका और जीत के दावों के बीच फंसी सांसें
प्रचार बंद होने के बाद अब असली परीक्षा उन 65 उम्मीदवारों की है जो पार्षद बनने का सपना संजोए मैदान में उतरे हैं। रैलियों की भीड़ देखकर जो प्रत्याशी अपनी जीत को लेकर आश्वस्त दिख रहे थे, अब एकांत में वही भीड़ उन्हें संशय में डाल रही है। जीत-हार की इसी शंका ने प्रत्याशियों की रातों की नींद उड़ा दी है। रविवार को 191 मतदान केंद्रों पर होने वाली वोटिंग ही तय करेगी कि अंबाला की जनता ने 'साइलेंट पीरियड' में किसके पक्ष में मन बनाया है।