Gurugram ED Raid: गुरुग्राम में ED की बड़ी कार्रवाई, ‘शिवा बिल्डटेक’ कंपनी के ठिकानों पर छापेमारी, डायरेक्टर्स के घर पहुंचे अधिकारी

गुरुग्राम में ED की बड़ी कार्रवाई, 'शिवा बिल्डटेक' कंपनी के ठिकानों पर छापेमारी, डायरेक्टर्स के घर पहुंचे अधिकारी
Gurugram ED Raid: साइबर सिटी गुरुग्राम में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने बुधवार सुबह सिविल कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की जानी-मानी कंपनी ‘शिवा बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड’ के खिलाफ बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू किया है। ईडी के करीब आधा दर्जन वरिष्ठ अधिकारियों की अगुवाई में जांच एजेंसी की अलग-अलग टीमें सुबह तड़के ही कंपनी के मुख्य दफ्तर और इसके निदेशकों के रिहाइशी ठिकानों पर जा पहुंचीं। अचानक हुई इस कार्रवाई से रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन गलियारों में हड़कंप मच गया है।
सेक्टर-14 और न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में अधिकारियों का डेरा
ईडी की एक टीम सेक्टर-14 स्थित मकान नंबर 644 पर पहुंची, जो कंपनी के निदेशक अशोक जैन का निवास स्थान है। वहीं दूसरी टीम सिविल लाइंस की न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में दूसरे निदेशक रोहित गुप्ता के मकान पर छापेमारी कर रही है। दोनों ही स्थानों पर स्थानीय पुलिस व केंद्रीय सुरक्षा बलों की मौजूदगी में घेराबंदी की गई है। सुरक्षा कारणों से परिसरों के भीतर किसी भी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश या बाहर जाने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय हेरफेर का शक, डिजिटल डिवाइस जब्त
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, यह पूरी कार्रवाई बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग के संदेह में की जा रही है। जांच अधिकारी कंपनी के पिछले कई सालों के वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक खातों की डिटेल, बेनामी संपत्तियों के दस्तावेज, लैपटॉप, हार्ड डिस्क और मोबाइल फोन खंगाल रहे हैं।
कई अहम फाइलों और डिजिटल डेटा को ईडी ने अपने कब्जे में ले लिया है। हालांकि, छापेमारी की इस कार्रवाई पर ईडी मुख्यालय की ओर से आधिकारिक बयान आना अभी बाकी है।
NHAI और GMDA के प्रोजेक्ट्स से जुड़ी है कंपनी, करोड़ों का टर्नओवर
30 मार्च 1998 से कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय में रजिस्टर्ड शिवा बिल्डटेक पिछले दो दशकों से अधिक समय से इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में सक्रिय है।
यह कंपनी राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (GMDA) जैसे बड़े सरकारी संस्थानों के लिए हाईवे, फ्लाईओवर, ऑडिटोरियम और बड़े कमर्शियल प्रोजेक्ट्स तैयार करती रही है। ₹100 करोड़ से ₹500 करोड़ तक सालाना टर्नओवर वाली इस कंपनी पर ईडी के शिकंजे से सरकारी प्रोजेक्ट्स के टेंडर में हुई संभावित गड़बड़ियों की ओर भी इशारा मिल रहा है।
