August 2, 2026

BVP Ladwa: लाडवा में ओलंपिक खिलाड़ी रमिता जिंदल का संवेनदनशील अंदाज, वृद्धाश्रम में बुजुर्गों को अपने हाथों से परोसा खाना

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BVP Ladwa: लाडवा में ओलंपिक खिलाड़ी रमिता जिंदल का संवेनदनशील अंदाज, वृद्धाश्रम में बुजुर्गों को अपने हाथों से परोसा खाना

लाडवा में ओलंपिक खिलाड़ी रमिता जिंदल का संवेनदनशील अंदाज

BVP Ladwa: (कैलाश गोयल) लाडवा के इंद्री रोड स्थित बाबा बंशीवाला वृद्धाश्रम में सोमवार को सेवा, संस्कार और कला का एक ऐसा त्रिवेणी संगम देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम और दिल को सुकून से भर दिया। अवसर था भारत विकास परिषद के मार्गदर्शक डॉ. सूरज प्रकाश की पावन जयंती का। इस खास दिन को परिषद की लाडवा इकाई ने किसी बंद कमरे या दफ्तर में मनाने के बजाय समाज के उन बुजुर्गों के बीच मनाने का फैसला किया, जिन्हें अपनों के साथ की सबसे ज्यादा दरकार है। इस पूरे आयोजन को और अधिक गौरवमयी बनाया पेरिस ओलंपिक की होनहार निशानेबाज रमिता जिंदल ने, जिन्होंने मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होकर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी की एक नई मिसाल पेश की।

6 साल के नौनिहाल से लेकर 70 साल के बुजुर्ग तक; संगीत के मंच पर एक साथ दिखीं तीन पीढ़ियां

प्रकल्प प्रमुख कुंवर सिंघल और अरविंद जिंदल ने बताया कि यह आयोजन केवल एक औपचारिक सभा नहीं था, बल्कि यह हरियाणा कला परिषद और भारत विकास परिषद के सहयोग से पिछले 15 दिनों से चल रही ग्रीष्मकालीन संगीत कार्यशाला का भव्य समापन भी था। जाने-माने संगीत निर्देशक दिलावर कौशिक के निर्देशन में चली इस कार्यशाला की खूबसूरती यह रही कि इसमें उम्र का कोई बंधन नहीं था।

मंच पर जब 6 साल के बच्चे ने 70 साल के बुजुर्ग के साथ मिलकर हारमोनियम, तबले, ढोलक और पियानो की जुगलबंदी पर शास्त्रीय बंदिशें और लोकगीत गाए, तो पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। प्रतिभागियों द्वारा गाए गए भजनों और सुगम संगीत की मधुर तानों ने आश्रम में रह रहे वृद्धों को कुछ पल के लिए अपने सारे दुख-दर्द भुलाकर झूमने पर मजबूर कर दिया। इस मौके पर हरियाणा कला परिषद के उपाध्यक्ष महेश जोशी और दिलावर कौशिक का आभार जताते हुए सभी 36 होनहारों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

डॉ. सूरज प्रकाश के आदर्शों पर चलने का संकल्प; सेवा कार्यों की हुई सराहना

समारोह के दौरान संस्था के प्रांतीय संगठन सचिव अरविंद सिंघल ने भारत विकास परिषद के सेवा सफर पर प्रकाश डाला। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि डॉ. सूरज प्रकाश जी ने जिस वैचारिक अधिष्ठान के साथ इस संस्था की नींव रखी थी, सेवा और समर्पण का वह दीया आज देश भर में लाखों लोगों की जिंदगी रोशन कर रहा है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि परिषद आने वाले समय में भी अंत्योदय और मानव सेवा के ऐसे प्रकल्पों को और अधिक मजबूती से जारी रखेगी। विशिष्ट अतिथि पूनम सैनी ने भी महिला सहभागिता और समाज निर्माण में ऐसे आयोजनों को बेहद जरूरी बताया।

“बुजुर्गों की सेवा ही ईश्वर की सच्ची इबादत” — रमिता जिंदल

सांस्कृतिक कार्यक्रम के समापन के बाद महाप्रसाद और भोजन वितरण का दौर शुरू हुआ। ओलंपिक एथलीट रमिता जिंदल, पवन गोयल और सुरेश कंसल सहित परिषद के तमाम सदस्यों ने खुद अपनी कलाइयां चढ़ाकर बुजुर्गों की पंगतों में भोजन परोसा। बुजुर्गों के चेहरों पर आई मुस्कान और उनके कांपते हाथों से मिले आशीर्वाद को पाकर रमिता जिंदल बेहद भावुक नजर आईं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, “मैदान पर देश के लिए मेडल जीतना एक अलग गौरव है, लेकिन समाज के इन बड़े-बुजुर्गों की थाली में भोजन परोसकर जो असीम शांति और दुआएं मिलती हैं, उसकी तुलना किसी पुरस्कार से नहीं की जा सकती।” इस भावुक और ऐतिहासिक पल के साक्षी बनने के लिए पूनम सिंगला, सुषमा सिंगला समेत शहर के कई गणमान्य नागरिक और भाविप के सभी समर्पित कार्यकर्ता देर शाम तक आश्रम में डटे रहे।

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