Curd with salt or Sugar Benefits: भारतीय रसोई में दही का अपना एक खास मुकाम है। गर्मी के दिनों में खाने के साथ एक कटोरी ठंडा दही, छाछ या रायता मिल जाए, तो खाने का स्वाद और आनंद दोनों दोगुने हो जाते हैं। यह न सिर्फ हमारी थाली का जायका बढ़ाता है, बल्कि पेट की सेहत, मजबूत हड्डियों और रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी को भी मजबूत करने में मदद करता है। हालांकि, सादे दही का खट्टापन हर किसी को पसंद नहीं आता। यही वजह है कि लोग इसे अपने स्वाद के मुताबिक ढालने के लिए इसमें या तो चीनी मिलाते हैं या फिर नमक।
जैसे ही कटोरी में चम्मच डलती है, यह सवाल सामने आ जाता है कि दही में नमक मिलाना बेहतर है या चीनी? आइए जानते हैं कि दोनों के अपने क्या नफे-नुकसान हैं और हेल्थ एक्सपर्ट्स इस बारे में क्या सलाह देते हैं।
क्यों माना जाता है दही को सुपरफूड?
दही को यूं ही सुपरफूड नहीं कहा जाता। इसमें शरीर के लिए जरूरी कई पोषक तत्व जैसे कैल्शियम, प्रोटीन, राइबोफ्लेविन, विटामिन बी-12 और गुड बैक्टीरिया (प्रोबायोटिक्स) प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं। ये तत्व आंतों की सेहत को सुधारते हैं और खाए हुए भोजन को आसानी से पचाने में मदद करते हैं। यही कारण है कि आयुर्वेद से लेकर आधुनिक विज्ञान तक, हर कोई डाइट में दही शामिल करने की सलाह देता है।
दही में चीनी मिलाकर खाने के फायदे और नुकसान
बहुत से लोगों को मीठा दही बेहद पसंद होता है, खासकर जब उसमें बूरा या चीनी घुली हो। खट्टापन कम होने से यह बच्चों से लेकर बड़ों तक को आसानी से भा जाता है। आयुर्वेद के अनुसार भी दोपहर के वक्त मीठा दही या लस्सी शरीर को तुरंत ऊर्जा देने का काम करती है।
लेकिन इसके दूसरे पहलू को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ‘क्लिनिकल डायबिटीज जर्नल’ में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, जरूरत से ज्यादा चीनी का सेवन शरीर के लिए कई गंभीर खतरे पैदा कर सकता है। इससे मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, दिल की बीमारियां और सुस्ती जैसी समस्याएं घेर सकती हैं। यदि आप वजन कम करने के मिशन पर हैं या फिर आपको शुगर की शिकायत है, तो मीठे दही से तौबा करना ही बुद्धिमानी है।
नमक वाला दही: जायका तो बेहतरीन, लेकिन सतर्कता जरूरी
भारतीय घरों में छाछ, रायते या फेटे हुए दही में काला नमक, भुना जीरा और सादा नमक मिलाकर खाना सबसे आम चलन है। गर्मियों में जब शरीर से पसीने के जरिए इलेक्ट्रोलाइट्स बाहर निकल जाते हैं, तो हल्का नमकीन या मसालेदार दही शरीर में पानी और नमक के संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है।
वहीं, वैज्ञानिक जर्नल ‘न्यूट्रिएंट्स’ की एक स्टडी चेतावनी देती है कि जरूरत से ज्यादा सोडियम यानी नमक का सेवन हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) और स्ट्रोक के खतरे को काफी हद तक बढ़ा देता है। इसलिए स्वाद के चक्कर में हद से ज्यादा नमक छिड़कना आपकी किडनी और दिल दोनों के लिए भारी पड़ सकता है।
तो फिर सेहत के लिए सबसे सही विकल्प क्या है?
अगर आप पूरी तरह से सेहतमंद रहना चाहते हैं, तो पोषण विशेषज्ञ हमेशा सादा (प्लेन) दही खाने की सलाह देते हैं। बिना किसी मिलावट के खाया गया सादा दही पेट और आंतों के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है।
यदि स्वाद के बिना काम न चले, तो चीनी या नमक दोनों का इस्तेमाल बेहद संभलकर और सीमित मात्रा में किया जाना चाहिए। जिन लोगों को डायबिटीज है या जो वजन घटा रहे हैं, उन्हें चीनी वाले दही से बचना चाहिए। इसके उलट, हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को अपने दही में नमक की मात्रा पर पैनी नजर रखनी चाहिए। कुल मिलाकर कहें, तो सेहत की चाबी संतुलन में ही छिपी है।


