August 2, 2026

Emergency 50th Anniversary: आपातकाल भारतीय लोकतंत्र का सबसे काला पन्ना; नीलोखेड़ी में डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने इतिहास पर घेरा

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Emergency 50th Anniversary: आपातकाल भारतीय लोकतंत्र का सबसे काला पन्ना; नीलोखेड़ी में डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने इतिहास पर घेरा

क्या आज की युवा पीढ़ी जानती है आपातकाल का सच?

Emergency 50th Anniversary: इतिहास केवल तारीखों का पुलिंदा नहीं होता, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक ऐसा सबक होता है जिससे सीखकर वे अपने भविष्य की बुनियाद तय करती हैं। कुछ ऐसा ही नजारा बुधवार को नीलोखेड़ी स्थित हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान में देखने को मिला, जहां एक ही मंच से देश के इतिहास के दो बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण पहलुओं पर गंभीर चर्चा हुई। मौका था 25 जून 1975 को देश पर थोपे गए आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ का और साथ ही देश की आन-बान-शान के लिए मर-मिटने वाले वीर शिरोमणि बाबा बंदा सिंह बहादुर के शहीदी दिवस का। इस विचार गोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद संस्थान के निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने इतिहास की कड़वी सच्चाइयों और राष्ट्रभक्ति के गौरवमयी पन्नों को परत-दर-परत युवाओं के सामने रखा।

जब रातों-रात बेड़ियों में जकड़ लिया गया था लोकतंत्र

संस्थान के निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने अपने संबोधन में 1975 के कालखंड का जिक्र करते हुए कहा कि आज से ठीक पांच दशक पहले जो आपातकाल देश पर लागू किया गया था, वह भारतीय लोकतंत्र के माथे पर एक ऐसा कलंक है जिसकी टीस आज भी महसूस की जाती है। उन्होंने युवा शोधार्थियों को बताया कि कैसे उस दौर में सत्ता के अहंकार में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व में समूचे विपक्ष को जेलखानों में ठूस दिया गया था, अखबारों के दफ्तरों की बिजली काट दी गई थी और आम नागरिकों के मौलिक अधिकार छीन लिए गए थे। डॉ. चौहान ने जोर देकर कहा कि आज की युवा पीढ़ी को इस संघर्ष की गाथा मालूम होनी चाहिए, ताकि वे समझ सकें कि आज वे जिस खुली हवा और अभिव्यक्ति की आजादी का आनंद ले रहे हैं, उसे बचाने के लिए देश ने कितनी बड़ी कीमत चुकाई है।

बाबा बंदा सिंह बहादुर: साहस और राष्ट्रसेवा की अमर मिसाल

लोकतंत्र के इस काले अध्याय की चर्चा के बीच, गोष्ठी में देश की माटी के महान सपूत बाबा बंदा सिंह बहादुर को भी याद किया गया। उनके शहीदी दिवस पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए डॉ. चौहान ने कहा कि उनका जीवन समाज को अन्याय के खिलाफ खड़े होने, अदम्य साहस दिखाने और राष्ट्र की सेवा में सर्वस्व न्योछावर करने की शाश्वत प्रेरणा देता है। युवाओं को ऐसे नायकों के जीवन चरित्र को अपने भीतर उतारना चाहिए।

किताबी दायरे से बाहर निकलकर समाज को समझें युवा: डॉ. वजीर सिंह

इस विचार गोष्ठी का एक बेहद व्यावहारिक पहलू तब सामने आया जब कार्यक्रम में मौजूद इंटर्नशिप कर रहे विद्यार्थियों के दायित्वों पर चर्चा हुई। डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने दो टूक शब्दों में कहा कि इंटर्नशिप कोई डिग्री या सर्टिफिकेट हासिल करने की महज एक शैक्षणिक औपचारिकता नहीं है। यह असल में समाज की नब्ज को पहचानने, ग्रामीण परिवेश की चुनौतियों को समझने और जनसेवा के जज्बे को निखारने का एक सुनहरा अवसर है।

इसके बाद इंटर्नशिप प्रभारी डॉ. वजीर सिंह ने छात्रों को संस्थान की पूरी कार्यप्रणाली और आगामी रूपरेखा से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि ग्रामीण विकास से जुड़े जमीनी मुद्दों पर जब छात्र व्यावहारिक अनुभव हासिल करेंगे, तो उनके व्यक्तित्व और कार्यकुशलता में एक बड़ा बदलाव आएगा। इस मौके पर संस्थान के सहायक आचार्य सुशील मेहता, संदीप कुमार सहित हैदराबाद के राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान से आए गुरबिंदर सिंह और कई अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। कार्यक्रम का समापन युवाओं द्वारा पूरी निष्ठा, अनुशासन और सामाजिक सरोकारों के साथ देश हित में काम करने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।

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