August 2, 2026

Kaithal News: कैथल के साहित्यकारों ने सोनीपत में गाड़े झंडे, समरसता और राष्ट्रभक्ति की कविताओं से जीता दिल

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Kaithal News: कैथल के साहित्यकारों ने सोनीपत में गाड़े झंडे, समरसता और राष्ट्रभक्ति की कविताओं से जीता दिल

आरएसएस शताब्दी वर्ष पर जुटे प्रदेशभर के कवि, डॉ. तेजिंद्र और सतपाल पराशर को मिला प्रांतीय सम्मान

Kaithal News:(संजय शर्मा)  कैथल के साहित्यिक गलियारों के लिए एक गौरवपूर्ण खबर सामने आई है। सोनीपत के गेटवे इंटरनेशनल स्कूल में आयोजित एक भव्य प्रांतीय कवि-सम्मेलन में कैथल के चार लब्धप्रतिष्ठित साहित्यकारों को उनकी उत्कृष्ट काव्य-साधना और वैचारिक लेखन के लिए सम्मानित किया गया।

यह गरिमामयी आयोजन अखिल भारतीय साहित्य परिषद हरियाणा की सोनीपत इकाई द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। मंच पर कैथल की साहित्यिक विधा का प्रतिनिधित्व कर रहे इन रचनाकारों की प्रतिभा को न केवल सराहा गया, बल्कि प्रांतीय परिषद द्वारा सौंपे गए विषयों पर उनके गहन चिंतन और लेखन के लिए उन्हें विशेष सम्मान से नवाजा गया।

अंग-वस्त्र और स्मृति-चिह्न भेंटकर हुआ अभिनंदन, दिग्गजों ने बढ़ाया मान

साहित्य सभा कैथल से जुड़े जिन चार प्रमुख चेहरो को यह गौरव हासिल हुआ है, उनमें परिषद की जिला इकाई के अध्यक्ष डॉ. तेजिंद्र, जिला महामंत्री सतपाल पराशर ‘आनंद’, प्रचार मंत्री राजेश भारती और आजीवन सदस्य सुरेश कुमार कल्याण शामिल हैं।

समारोह के दौरान स्वदेशी जागरण मंच एवं स्वावलंबी भारत अभियान के आयुर्वेदाचार्य डॉ. धर्मवीर मलिक योगी, परिषद के पूर्व प्रांत अध्यक्ष प्रोफेसर सारस्वत मोहन मनीषी और राष्ट्रीय साधना काव्य संध्या के राष्ट्रीय संयोजक प्रवीण आर्य ने चारों कवियों को पारंपरिक अंग-वस्त्र, प्रशस्ति-पत्र, स्मृति-चिह्न और पंच मुरब्बा प्रोजेक्ट भेंट कर सम्मानित किया।

राष्ट्रभक्ति से लेकर पारिवारिक मूल्यों तक, कविताओं ने बांधा समां

सम्मान पाने के बाद चारों कवियों ने मंच से अपनी लेखनी का जादू बिखेरा और समसामयिक विषयों पर काव्य-आहुतियां दीं। संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार को नमन करते हुए डॉ. तेजिंद्र ने अपनी पंक्तियों से राष्ट्रभक्ति का ज्वार भाटा पैदा किया। उन्होंने पढ़ा: ‘स्वतंत्रता-सेनानी थे, संघर्षों की अजब कहानी थे।

वंदे मातरम् के उद्घोषक, सामाजिक समरसता के पोषक।’ वहीं, समाज में बिखरते ताने-बाने के बीच परिवार की अहमियत को रेखांकित करते हुए सतपाल पराशर ‘आनंद’ ने अपनी बात कुछ इस तरह रखी: ‘प्रथम इकाई देश की, होता है परिवार। कुटुंब के नाम से, जाने सब संसार।’

जन्मभूमि के गौरव और खुद के वजूद पर बही विधा

इसी क्रम में कवि सुरेश कुमार कल्याण ने देश की माटी का महिमा-मंडन करते हुए भावुक कर देने वाली पंक्तियां पढ़ीं: ‘जन्म-भूमि है मातृवत्, करवाती रसपान। सुंदर है यह स्वर्ग से, मातृ-भूमि भगवान।’ आखिर में कवि राजेश भारती ने जीवन के यथार्थ और खुद के वजूद को बेहद दार्शनिक अंदाज में शब्दों में पिरोते हुए पढ़ा: ‘समय की लकीर पर खड़ा हूँ मैं, पैरों के नीचे धूल है और सिर पर आकाश।’

चारों साहित्यकारों को मिले इस प्रांतीय सम्मान पर कैथल के सांस्कृतिक और साहित्यिक जगत के लोगों ने हर्ष व्यक्त करते हुए इसे जिले के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया है।

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