September 17, 2026

Hansi News: हांसी के गांव में छाई रितु यादव, शादी में दिया बेटों के बराबर दर्जा, जानें रितु ने ऐसा क्या किया 

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Hansi News: हांसी के गांव में छाई रितु यादव, शादी में दिया बेटों के बराबर दर्जा, जानें रितु ने ऐसा क्या किया 

हांसी के गांव में छाई रितु यादव, शादी में दिया बेटों के बराबर दर्जा, जानें रितु ने ऐसा क्या किया 

Hansi News: हांसी क्षेत्र के गांव चोरटापुर बाड़ा में एक परिवार ने समाज के सामने रूढ़िवादी सोच को दरकिनार कर मिसाल पेश की है। दिल्ली से उच्च शिक्षा हासिल कर बैंकिंग क्षेत्र में डिप्टी मैनेजर के पद तक पहुंची रितु यादव को उसके परिवार ने सिर्फ शिक्षा और करियर में ही नहीं, बल्कि शादी की परंपराओं में भी बेटों के बराबर का दर्जा दिया। परिवार ने शादी से पहले रितु को घोड़ी पर बैठाकर पूरे गांव में गाजे-बाजे के साथ उसका बनवारा और घुड़चढ़ी निकाली।

सीआरपीएफ जवान पिता ने दिल्ली भेजकर दिलाई उच्च शिक्षा, बैंक में बनीं डिप्टी मैनेजर

रितु के पिता नरेंद्र यादव सीआरपीएफ में बतौर जवान तैनात हैं। उन्होंने अपनी बेटी की पढ़ाई-लिखाई में कोई कसर नहीं छोड़ी। रितु को उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली भेजा गया, जहां से उसने स्नातक और एमए की डिग्री पूरी की। अपनी मेहनत के बल पर रितु ने बैंकिंग सेक्टर में कदम रखा और पदोन्नति पाते हुए डिप्टी मैनेजर के ओहदे तक पहुंची। रितु की इस कामयाबी पर न केवल उसके परिवार को, बल्कि पूरे गांव को गर्व है।

ताऊ ने बेटी मानकर निभाई हर रस्म, 1 दिसंबर को घोड़ी पर सवार होकर निकला बनवारा

रितु के ताऊ बलवंत प्रधान बताते हैं कि उनके दो बेटे हैं और उनके छोटे भाई नरेंद्र के एक बेटा व एक बेटी है। बेटी न होने के कारण उन्होंने रितु को हमेशा अपनी सगी बेटी की तरह माना और लाड-प्यार दिया। परिवार ने पहले ही तय कर लिया था कि रितु के विवाह में वही खुशियां मनाई जाएंगी जो बेटों के विवाह में मनाई जाती हैं। इसी सोच के तहत परिवार ने रितु की शादी से तीन दिन पहले, 1 दिसंबर को गांव चोरटापुर बाड़ा में उसकी घुड़चढ़ी निकाली।

गुड़गांव के व्यवसायी से हुई शादी, महीनों बाद भी मिसाल बनी चोरटापुर बाड़ा की यह पहल

रितु की शादी 4 दिसंबर को गुरुग्राम के एक प्रतिष्ठित व्यवसायी के साथ संपन्न हुई थी। लेकिन शादी से पहले परिवार द्वारा ली गई इस अनूठी पहल की गूंज आज भी इलाके में सुनाई देती है। परिजनों का कहना है कि जब बेटियां पढ़ाई, लिखाई और नौकरियों में लड़कों से कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रही हैं, तो विवाह से जुड़ी रस्मों-रिवाजों में उनके साथ भेदभाव क्यों किया जाए? चोरटापुर बाड़ा गांव से उठी यह आवाज आज समाज में बेटा-बेटी एक समान का सशक्त संदेश दे रही है।

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