Haryana Unemployment Rate: हरियाणा में बेरोजगारी पर बड़ा प्रहार, 5 साल में आधे से भी कम हुए आंकड़े, PLFS की रिपोर्ट में खुलासा

हरियाणा में बेरोजगारी पर बड़ा प्रहार, 5 साल में आधे से भी कम हुए आंकड़े, PLFS की रिपोर्ट में खुलासा
Haryana Unemployment Rate: रोजगार को लेकर लंबे समय से चर्चा और सियासत के केंद्र में रहे हरियाणा के लिए केंद्र सरकार के ताजा आंकड़े राहत भरी खबर लेकर आए हैं। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) की नवीनतम रिपोर्ट बताती है कि प्रदेश में बीते पांच वर्षों के भीतर बेरोजगारी दर में ऐतिहासिक गिरावट आई है। कभी दोहरे अंकों में रहने वाली राज्य की कुल बेरोजगारी दर अब घटकर 4.8 प्रतिशत पर आ सिमटी है, जो वर्ष 2021 के मुकाबले आधे से भी कम है।
युवा बेरोजगारी में 11 प्रतिशत से ज्यादा की सेंध
राज्य में सबसे बड़ा बदलाव युवाओं की रोजगार स्थिति में देखने को मिला है। अक्टूबर-दिसंबर 2021 में जहां 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं में बेरोजगारी का आंकड़ा 22.9 प्रतिशत के भयावह स्तर पर था, वहीं अप्रैल-जून 2026 की तिमाही में यह घटकर 11.8 प्रतिशत रह गया। यानी पांच वर्षों में युवा बेरोजगारी दर में 11.1 प्रतिशत अंक की सीधी कमी आई है। एक साल पहले यानी अप्रैल-जून 2025 में भी यह दर 15.6 प्रतिशत दर्ज की गई थी, जिसमें पिछले 12 महीनों के दौरान 3.8 प्रतिशत अंक का सुधार आया है।
पड़ोसी राज्यों हिमाचल और पंजाब से बहुत बेहतर स्थिति
पड़ोसी राज्यों से तुलना करें तो अप्रैल-जून 2026 की अवधि में हरियाणा की स्थिति काफी बेहतर नजर आती है। पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश में 15 से 29 साल के युवाओं में बेरोजगारी दर 24.1 प्रतिशत रही, जो हरियाणा के 11.8 प्रतिशत के मुकाबले दोगुनी से भी अधिक है। हिमाचल की कुल बेरोजगारी दर भी 6.3 प्रतिशत दर्ज की गई। वहीं पंजाब में भी युवा बेरोजगारी दर 22.3 प्रतिशत और ओवरऑल बेरोजगारी दर 8.5 प्रतिशत के उच्च स्तर पर बनी हुई है।
अब चुनौती ‘क्वालिटी जॉब्स’ पैदा करने की: एक्सपर्ट्स
आंकड़ों में आए इस सकारात्मक सुधार पर हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के प्रोफेसर रंजन अनेजा का कहना है कि यह बदलाव राज्य के लिए बेहद मायने रखता है, क्योंकि हरियाणा लंबे समय तक ऊंची बेरोजगारी दर के लिए जाना जाता रहा है। हालांकि, वे सचेत करते हैं कि केवल बेरोजगारी दर कम होना ही समस्या का अंतिम समाधान नहीं है। अब सरकार और नीति निर्माताओं का असली ध्यान इस बात पर होना चाहिए कि पैदा हो रहे रोजगार उत्पादक, सम्मानजनक और दीर्घकालिक हों, ताकि युवाओं को उनकी योग्यता और कौशल के अनुरूप अवसर मिल सकें।
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