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हरियाणा सरकार का बड़ा ऐलान: ड्यूटी पर शहीद होने वाले कर्मचारियों के परिवार को मिलेंगे 30 लाख

Apr 12, 2026 5:06 PM

हरियाणा। हरियाणा की नायब सैनी सरकार ने प्रदेश के उन जांबाज कर्मचारियों के लिए खजाना खोल दिया है, जो अपनी जान जोखिम में डालकर जनता की सेवा करते हैं। मुख्यमंत्री ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए ड्यूटी के दौरान हादसे का शिकार होने वाले ग्रुप C और D श्रेणी के कर्मचारियों के आश्रितों के लिए मिलने वाली आर्थिक सहायता राशि में भारी बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। अब शोक संतप्त परिवारों को कुल 30 लाख रुपये की सम्मानजनक सहायता राशि दी जाएगी।

जोखिम उठाने वालों को मिला सम्मानजनक सुरक्षा कवच

हरियाणा सरकार का यह फैसला उन हजारों कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है जो हर दिन खतरों से खेलते हैं। चाहे वह अवैध खनन रोकने वाले माइनिंग गार्ड हों, जंगलों की रक्षा करने वाले वन कर्मी या फिर आग की लपटों के बीच कूदने वाले फायर फाइटर्स। अक्सर इन विभागों में ग्रुप C और D श्रेणी के कर्मचारी ही फ्रंटलाइन पर तैनात होते हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्पष्ट किया है कि सरकार अपने उन 'कोरोना योद्धाओं' और 'कर्मवीरों' के साथ खड़ी है जो ड्यूटी के दौरान वीरगति को प्राप्त होते हैं।

दो अलग-अलग कोषों से मिलेगी 30 लाख की मदद

सरकारी प्रवक्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि इस सहायता राशि का ढांचा दो हिस्सों में तैयार किया गया है। पहले चरण में 'मुख्यमंत्री हरियाणा कर्मचारी दुर्घटना सुरक्षा योजना' के तहत 10 लाख रुपये का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री ने विशेष संवेदनशीलता दिखाते हुए 'मुख्यमंत्री राहत कोष' से 20 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि जोड़ने का फैसला किया है। इस तरह, अब मृतक कर्मचारी का परिवार कुल 30 लाख रुपये की आर्थिक मदद का हकदार होगा।

लालफीताशाही पर लगाम: अधिकारियों को कड़े निर्देश

अक्सर देखा जाता है कि सरकारी सहायता मिलने में कागजी कार्यवाही की वजह से महीनों लग जाते हैं। लेकिन इस मामले में नायब सैनी सरकार ने सख्त रुख अख्तियार किया है। हरियाणा अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विभाग ने इस संबंध में लिखित आदेश जारी कर दिए हैं। अधिकारियों को साफ कहा गया है कि कानूनी औपचारिकताएं (Paperwork) महज एक प्रक्रिया होनी चाहिए, न कि भुगतान में रुकावट। संबंधित विभाग के मुखियाओं को निर्देश हैं कि मृतक कर्मचारी के आश्रितों के बैंक खाते में यह राशि 'प्रायोरिटी' के आधार पर जमा होनी चाहिए।

कर्मचारियों के मनोबल में होगी वृद्धि

राजनीतिक और प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि इस फैसले से फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा। जब एक कर्मचारी को पता होता है कि उसके पीछे सरकार उसके परिवार की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठा रही है, तो वह अपनी जिम्मेदारी को और अधिक निडरता से निभा पाता है। विपक्ष और कर्मचारी यूनियनों ने भी दबी जुबान में सरकार के इस कदम की सराहना की है, क्योंकि लंबे समय से इस सहायता राशि को बढ़ाए जाने की मांग की जा रही थी।

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