RTE Admission 2026: हरियाणा के प्राइवेट स्कूलों में फ्री दाखिले शुरू, 16 अप्रैल तक करें आवेदन
Apr 12, 2026 11:31 AM
हरियाणा। हरियाणा के मध्यम और कम आय वर्ग वाले परिवारों के लिए अपने बच्चों को नामी प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाने का सपना सच होने जा रहा है। शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम 2009 के तहत शैक्षणिक सत्र के लिए दाखिला प्रक्रिया को हरी झंडी मिल गई है। इस बार अकेले हिसार जिले में विभिन्न प्राइवेट स्कूलों की 25 प्रतिशत आरक्षित श्रेणी के तहत 3592 सीटों को चिह्नित किया गया है। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि आवेदन केवल ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे, जिसकी अंतिम तारीख 16 अप्रैल तय की गई है।
उम्र का पेंच और सीटों का बंटवारा
आरटीई के तहत दाखिला लेने के लिए सरकार ने आयु सीमा के कड़े मानक तय किए हैं। यदि आप अपने बच्चे का दाखिला नर्सरी में कराना चाहते हैं, तो उसकी उम्र 3 वर्ष होनी चाहिए। इसी तरह एलकेजी के लिए 4 साल, यूकेजी के लिए 5 साल और पहली कक्षा के लिए 6 वर्ष की आयु पूरी होना अनिवार्य है। हिसार में सीटों के वर्गीकरण पर नजर डालें तो नर्सरी के लिए सबसे ज्यादा 1645 सीटें हैं, जबकि पहली कक्षा के लिए 1720 बच्चों को प्रवेश मिलेगा। एलकेजी और यूकेजी के लिए क्रमशः 50 और 177 सीटें आरक्षित हैं।
लॉटरी सिस्टम से खुलेगी किस्मत, 3 KM का दायरा अहम
अभिभावकों को आवेदन करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना होगा कि वे अपने घर से 3 किलोमीटर के दायरे में आने वाले स्कूलों को ही प्राथमिकता दे सकें। दाखिले की पूरी प्रक्रिया को विवादों से दूर और पारदर्शी रखने के लिए विभाग 'कंप्यूटरीकृत लॉटरी प्रणाली' का सहारा लेगा। यानी किसी भी स्कूल प्रबंधन की मनमानी नहीं चलेगी और भाग्यशाली बच्चों का चयन डिजिटल ड्रॉ के जरिए होगा। चयन के बाद निर्धारित समय में स्कूल पहुंचकर रिपोर्ट करना होगा, वरना वह सीट वेटिंग लिस्ट वाले दूसरे बच्चे को ट्रांसफर कर दी जाएगी।
कागजी कार्रवाई में न बरतें ढिलाई
विभागीय अधिकारियों ने अभिभावकों को सलाह दी है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना जल्द से जल्द फॉर्म भर दें, क्योंकि आखिरी दिनों में सर्वर डाउन होने की समस्या अक्सर पेश आती है। फॉर्म भरते समय परिवार पहचान पत्र (Family ID) और बच्चे के आधार कार्ड की स्पष्ट स्कैन कॉपी अपलोड करना न भूलें। दस्तावेजों में छोटी सी भी त्रुटि या धुंधली फोटो आवेदन रद्द होने का कारण बन सकती है। यह उन वंचित वर्ग के बच्चों के लिए एक बड़ा अवसर है जो आर्थिक तंगी के कारण महंगे स्कूलों की फीस वहन नहीं कर सकते।