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Hathnikund Barrage Yamunanagar: हथनीकुंड बैराज पर मंडराया खतरा, क्षतिग्रस्त रैंप से बाहर आए सरिए, टेंडर में भारी ढिलाई

Hathnikund Barrage Yamunanagar: हथनीकुंड बैराज पर मंडराया खतरा, क्षतिग्रस्त रैंप से बाहर आए सरिए, टेंडर में भारी ढिलाई

मानसून में खतरे में हथनीकुंड बैराज, ₹3 करोड़ के टेंडर पर उठे सवाल, क्या झेल पाएगा पानी का बहाव?

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GGaganpreet Kaur

Hathnikund Barrage Yamunanagar: यमुनानगर जिले की जीवनरेखा और हरियाणा, दिल्ली व उत्तर प्रदेश के लिए सुरक्षा कवच माना जाने वाला हथनीकुंड बैराज एक बार फिर सिंचाई विभाग की बदहाली और प्रशासनिक सुस्ती का शिकार हो गया है। एक तरफ जहां मानसूनी बारिश के चलते नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है और बैराज से लाखों क्यूसेक पानी छोड़े जाने की तैयारी है, वहीं दूसरी ओर बैराज के बेहद अहम हिस्से यानी क्षतिग्रस्त ‘ग्लेसिस’ (रैंप) को अपने हाल पर छोड़ दिया गया है। जर्जर हो चुके इन रैंप में बड़े-बड़े गड्ढे (छिद्र) हो गए हैं और कंक्रीट उखड़ने के कारण लोहे के सरिए बाहर झांक रहे हैं।

हैरानी की बात यह है कि विभाग ने बैराज को मजबूती देने के लिए हाल ही में करीब ₹140 करोड़ की भारी-भरकम लागत से ‘डायफ्राम वॉल’ का निर्माण कराया था। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पूरा होने में दो से ढाई साल का समय लगा। लेकिन जब यह भारी-भरकम काम चल रहा था, तब मौका मुआयना करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों ने सामने दिख रहे क्षतिग्रस्त ग्लेसिस की तरफ से आंखें मूंदे रखीं। नतीजा यह हुआ कि बारिश का सीजन सिर पर आते ही बैराज की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक संकट खड़ा हो गया है।

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लाखों क्यूसेक पानी के थपेड़ों से बढ़ सकता है कटाव, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा

विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दौरान जब पहाड़ों में तेज बारिश होगी, तो हथनीकुंड बैराज से उफनता हुआ लाखों क्यूसेक पानी इसी रैंप के ऊपर से होकर गुजरेगा। पहले से कमजोर और उखड़े हुए कंक्रीट पर जब पानी का भारी दबाव पड़ेगा, तो रैंप के और बुरी तरह डैमेज होने का खतरा बढ़ जाएगा। बैराज के रैंप का जब मौके पर जाकर निरीक्षण किया गया, तो लगभग सभी रैंप जर्जर अवस्था में दिखे। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर पानी का तेज बहाव आया, तो बैराज के मुख्य ढांचे को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे निचले इलाकों में तबाही की स्थिति बन सकती है।

मामले की गंभीरता पर जब हरियाणा सिंचाई विभाग के सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर प्रवीण गुप्ता से बात की गई, तो उन्होंने माना कि टेंडर प्रक्रिया में ढील और देरी हुई है। उन्होंने बताया कि अब जाकर 3 करोड़ रुपये की लागत से मरम्मत का टेंडर जारी किया गया है। चूंकि बरसाती सीजन शुरू हो चुका है, इसलिए रैंप की पूरी रिपेयरिंग का काम अब मानसून के बीत जाने के बाद ही संभव हो पाएगा।

अधिकारी बोले—’एजेंसी करेगी 2 साल की गारंटी’, लेकिन क्या सुरक्षित रहेगा इलाका?

सिंचाई विभाग के सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर ने सफाई देते हुए कहा कि टेंडर में हुई देरी के बावजूद विभाग ने अपने स्तर पर दो रैंपों की जरूरी मरम्मत करवा ली है और बाकी रैंपों को भी सुरक्षा के लिहाज से संभाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि अनुबंध के तहत यदि अगले दो सालों में रैंप में कोई खराबी आती है, तो संबंधित एजेंसी को अपने खर्चे पर ही इसकी रिपेयरिंग करनी होगी।

अधिकारी भले ही यह दावा कर रहे हों कि इससे बैराज को कोई बड़ा खतरा नहीं होगा, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या इस प्रशासनिक ढिलाई का खामियाजा यमुना किनारे बसे दर्जनों गांवों और बैराज के सुरक्षा तंत्र को भुगतना पड़ेगा? फिलहाल तो यही उम्मीद की जा सकती है कि यह मानसूनी सीजन बिना किसी बड़ी तबाही के गुजर जाए और विभाग अपनी नींद से जागकर समय रहते इस राष्ट्रीय धरोहर और सुरक्षा ढांचे की पुख्ता मरम्मत कराए।

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