August 2, 2026

Jyestha Purnima 2026 Date: ज्येष्ठ पूर्णिमा पर भद्रा का साया, जानिए 29 जून को स्नान-दान और पूजा का सबसे उत्तम मुहूर्त

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Jyestha Purnima 2026 Date: ज्येष्ठ पूर्णिमा पर भद्रा का साया, जानिए 29 जून को स्नान-दान और पूजा का सबसे उत्तम मुहूर्त

29 जून को ज्येष्ठ पूर्णिमा, दोपहर तक रहेगी भद्रा

Jyestha Purnima 2026 Date: हिंदू पंचांग में पूर्णिमा तिथि को अध्यात्म और पुण्य कर्मों के लिहाज से बेहद पवित्र माना गया है। इनमें भी ज्येष्ठ महीने की पूर्णिमा का महत्व बाकी पूर्णिमाओं की तुलना में कहीं अधिक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु, धन की देवी माता लक्ष्मी और मन के कारक चंद्रदेव की पूरे विधि-विधान से पूजा की जाती है।

माना जाता है कि ऐसा करने से न सिर्फ मानसिक शांति मिलती है, बल्कि घर की आर्थिक तंगी दूर होती है और सुख-समृद्धि का वास होता है। इस साल ज्येष्ठ पूर्णिमा पर भद्रा का साया रहने के कारण श्रद्धालुओं को स्नान और दान के सही समय का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

पंचांग गणना: जानिए कब से कब तक है पूर्णिमा तिथि

ज्योतिषीय गणना और द्रिक पंचांग के मुताबिक, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि का आगाज 29 जून 2026 को तड़के 3 बजकर 06 मिनट पर हो जाएगा।

यह तिथि अगले दिन यानी 30 जून 2026 को सुबह 5 बजकर 26 मिनट पर समाप्त होगी। चूंकि सनातन धर्म में उदयातिथि यानी सूर्योदय के समय मौजूद तिथि को त्योहार के लिए मुख्य माना जाता है, इसलिए ज्येष्ठ पूर्णिमा का पर्व 29 जून, सोमवार को ही मनाया जाएगा। इसी दिन श्रद्धालु व्रत रखेंगे और रात में चंद्रदेव को अर्घ्य देंगे।

भद्राकाल का साया, जानिए क्या करें और क्या नहीं

इस साल की ज्येष्ठ पूर्णिमा पर भद्रा का एक बड़ा पेंच फंस रहा है। 29 जून को पूर्णिमा तिथि शुरू होने के साथ ही सुबह 3 बजकर 06 मिनट से भद्राकाल भी लग जाएगा, जो दोपहर 4 बजकर 16 मिनट तक रहेगा।

ज्योतिष शास्त्र में भद्रा को शुभ कार्यों के लिए निषेध माना गया है। इस दौरान शादी-ब्याह, मुंडन, गृह प्रवेश या नया व्यापार शुरू करने जैसे मांगलिक कार्यों पर पूरी तरह रोक रहती है। हालांकि, विद्वानों का कहना है कि भद्राकाल में नियमित पूजा-पाठ, मंत्रों का जप, सत्यनारायण कथा, तीर्थ स्नान और दान-पुण्य करने में कोई मनाही नहीं होती, बल्कि इस दौरान भगवान की भक्ति और अधिक फलदायी होती है।

स्नान और दान के सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त

भले ही मांगलिक कार्यों के लिए समय अनुकूल न हो, लेकिन पूर्णिमा का मुख्य स्नान और दान सूर्योदय से लेकर पूरे दिन किया जा सकता है। पंचांग के अनुसार 29 जून को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 06 मिनट से 4 बजकर 46 मिनट तक रहेगा, जो नदी स्नान के लिए सबसे उत्तम समय है। यदि किसी पवित्र नदी या तीर्थ स्थान पर जाना संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है।

इसके बाद अभिजीत मुहूर्त (सुबह 11:57 से दोपहर 12:52 बजे) में मुख्य पूजा की जा सकती है। शाम को 7 बजकर 16 मिनट पर चंद्रोदय होगा, जिसके बाद व्रत रखने वाले जातक चंद्रमा को जल अर्पित कर अपना व्रत खोल सकेंगे। स्नान के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र, घी, चीनी या सफेद वस्तुओं का दान करना अचूक फल देता है।

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