August 3, 2026

Ladwa Jugad Vehicles: लाड़वा में खौफ का दूसरा नाम बनीं ‘बाइक रेहड़ियां’, सीएम सिटी में प्रशासन की लापरवाही से भड़के लोग

0
Ladwa Jugad Vehicles: लाड़वा में खौफ का दूसरा नाम बनीं 'बाइक रेहड़ियां', सीएम सिटी में प्रशासन की लापरवाही से भड़के लोग

Ladwa Jugad Vehicles: लाड़वा में खौफ का दूसरा नाम बनीं 'बाइक रेहड़ियां', सीएम सिटी में प्रशासन की लापरवाही से भड़के लोग

Ladwa Jugad Vehicles: लाड़वा (कैलाश गोयल): सूबे के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के गृह निर्वाचन क्षेत्र लाड़वा की सड़कों पर इन दिनों कानून और सुरक्षा व्यवस्था को मुंह चिढ़ाता एक अनोखा खेल धड़ल्ले से चल रहा है। क्षेत्र में कबाड़ हो चुके मोटरसाइकिल और स्कूटर के इंजनों को काटकर बनाई गईं ‘बाइक रेहड़ियां’ (जुगाड़ वाहन) न सिर्फ यातायात नियमों की धज्जियां उड़ा रही हैं, बल्कि राहगीरों की जान के लिए भी बड़ा खतरा बन गई हैं। हैरानी की बात यह है कि वीआईपी हलका होने के बावजूद स्थानीय प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस ने इस गंभीर समस्या से अपनी आंखें मूंद रखी हैं, जिससे इन अवैध वाहन चालकों के हौसले बुलंद हैं।

 

पैडल मारने की थकावट से बचने के लिए कानून से खिलवाड़

जमीनी हकीकत यह है कि शारीरिक थकावट से बचने और कम समय में ज्यादा मुनाफा कमाने की चाहत ने लाड़वा में ‘जुगाड़ संस्कृति’ को जन्म दे दिया है। लोग पुरानी बाइकों के अगले हिस्से को रेहड़ी से जोड़कर एक अवैध कमर्शियल गाड़ी तैयार कर लेते हैं। इन कथित गाड़ियों के पास न तो कोई वैध रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) होता है और ना ही इनके चालकों के पास ड्राइविंग लाइसेंस। इसके बावजूद, इन रेहड़ियों पर भारी-भरकम लोहे के एंगल, रेता-बजरी, ईंटें, फर्नीचर और लंबे-लंबे प्लास्टिक पाइप लादकर इन्हें मुख्य बाजारों और व्यस्त चौराहों से पूरी रफ्तार में निकाला जाता है।

 

“सामान ज्यादा था, ब्रेक नहीं लगे”—भुक्तभोगियों ने बयां किया दर्द

सड़क सुरक्षा के इस गंभीर मुद्दे पर स्थानीय दुकानदार कृष्ण लालर (कृष्ण सिंह) ने अपना कड़वा अनुभव साझा करते हुए बताया, “बीते दिनों जब मैं दुकान बढ़ाकर घर लौट रहा था, तभी एक तेज रफ्तार बाइक रेहड़ी ने मेरी कार को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। जब मैंने उसे रोककर जवाब मांगा, तो उसका सीधा सा तर्क था कि ‘सामान ज्यादा लदा है, इसलिए ब्रेक नहीं लगे।’ कार ठीक करवाने की बात कहते ही वह मौका पाकर फरार हो गया।” कृष्ण ने दर्द बयां करते हुए कहा कि भारी वजन और तेज रफ्तार के कारण इन जुगाड़ वाहनों में संतुलन बिगड़ना और ब्रेक फेल होना आम बात है, जिसके चलते छोटे-मोटे हादसे तो अब रोज की बात बन चुके हैं।

 

टैक्स भरने वाले वाहन चालक दाने-दाने को मोहताज, मुख्यमंत्री से गुहार

इस अवैध परिवहन व्यवस्था की सबसे बड़ी मार उन गरीब चार पहिया वाहन चालकों पर पड़ रही है जो सरकार को बकायदा टैक्स और परमिट फीस चुकाते हैं। कमर्शियल गाड़ी चालक श्रवण कुमार और उनके साथियों ने भरे मन से कहा, “हम लोग बैंकों से कर्ज लेकर, सरकार को भारी-भरकम टैक्स भरकर गाड़ियां चलाते हैं। लेकिन इन बिना परमिट और बिना टैक्स वाली अवैध रेहड़ियों के कारण हमें बाजार में कोई काम नहीं मिल रहा। हालत यह है कि घर का चूल्हा जलना तो दूर, गाड़ियों की मासिक किस्तें निकालना भी पहाड़ पार करने जैसा हो गया है। रसूखदार लोग एक साथ कई-कई जुगाड़ू रेहड़ियां बनवाकर सड़कों पर उतार रहे हैं।”

वाहन चालकों और स्थानीय दुकानदारों ने सामूहिक रूप से मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और जिला प्रशासन से हाथ जोड़कर प्रार्थना की है कि लाड़वा की सड़कों को इन जानलेवा जुगाड़ वाहनों से मुक्त कराया जाए, ताकि सड़क पर चलने वाले आम नागरिक सुरक्षित महसूस कर सकें और वैध कामगारों की रोजी-रोटी भी बच सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed