Mahendragarh News: महेंद्रगढ़ को मिलीं 4 नई ALS एंबुलेंस, अब रास्ते में ही मिलेगा ICU जैसा वेंटिलेटर सपोर्ट
महेंद्रगढ़ को मिलीं 4 नई ALS एंबुलेंस, अब रास्ते में ही मिलेगा ICU जैसा वेंटिलेटर सपोर्ट
Mahendragarh News: हरियाणा के महेंद्रगढ़ (नारनौल) जिले की आपातकालीन स्वास्थ्य प्रणाली को और मजबूत करते हुए राज्य सरकार ने चार नई एडवांस लाइफ सपोर्ट (ALS) एंबुलेंस बेड़े में शामिल की हैं। इन नई गाड़ियों के सड़कों पर उतरने के साथ ही जिले में सरकारी एंबुलेंसों की कुल संख्या 26 से बढ़कर 30 हो गई है। स्वास्थ्य विभाग के इस कदम से दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों और हादसों के वक्त गंभीर रूप से घायल या बीमार मरीजों को बेहद कम समय में आपातकालीन चिकित्सा सहायता मिल सकेगी।
‘गोल्डन ऑवर’ में बचेगा जीवन, एंबुलेंस में तैनात रहेगा प्रशिक्षित स्टाफ
प्रदेश की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने बताया कि सड़क दुर्घटना, हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक और प्रसव से जुड़ी जटिलताओं में शुरुआती एक घंटे का समय यानी ‘गोल्डन ऑवर’ सबसे निर्णायक होता है। अगर इस वक्त मरीज को सही इलाज मिल जाए तो उसकी जान बचने की गुंजाइश कई गुना बढ़ जाती है। नई ALS एंबुलेंस में वेंटिलेटर, डिफिब्रिलेटर, मल्टी-पैरामीटर मॉनिटर और ऑक्सीजन जैसी अत्याधुनिक आईसीयू सुविधाएं मौजूद हैं। प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ रास्ते भर मरीज के स्वास्थ्य संकेतों की निगरानी करते हुए तुरंत जीवनरक्षक दवाएं दे सकेगा।
“प्रदेश का कोई नागरिक समय पर इलाज से वंचित न रहे” – आरती सिंह राव
स्वास्थ्य मंत्री ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को लगातार आधुनिक बनाने में जुटी है। अस्पतालों के उन्नयन, आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता और एंबुलेंस नेटवर्क के विस्तार से लेकर डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया पर तेजी से काम हो रहा है। सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि किसी भी नागरिक को केवल त्वरित इलाज न मिलने के कारण अपनी जान न गंवानी पड़े। आने वाले दिनों में आपातकालीन सेवाओं को और सुदृढ़ किया जाएगा।
कंट्रोल रूम फ्लीट मैनेजर ने जताया आभार, मरीजों को मिलेगा सीधा फायदा
एंबुलेंस कंट्रोल रूम के फ्लीट मैनेजर उमेश सैनी ने बताया कि इन नई एंबुलेंसों के आने से महेंद्रगढ़ जिले के रिस्पॉन्स टाइम में सुधार आएगा। खासतौर पर नारनौल और आसपास के इलाकों में हाईवे पर होने वाले सड़क हादसों के पीड़ितों को अब बड़े ट्रॉमा सेंटर तक रेफर करने के दौरान रास्ते में ही क्रिटिकल केयर मिल सकेगी। इससे जिला अस्पताल और स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों पर दबाव कम होगा और मरीजों को बेहतर सेवा मिल पाएगी।
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