August 2, 2026

Dhand News: ढांड अनाज मंडी में खुली दावों की पोल, हल्की बारिश में ही जलमग्न हुई मंडी, गेट नंबर-5 बना तालाब

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Dhand News: ढांड अनाज मंडी में खुली दावों की पोल, हल्की बारिश में ही जलमग्न हुई मंडी, गेट नंबर-5 बना तालाब

ढांड अनाज मंडी में खुली दावों की पोल, हल्की बारिश में ही जलमग्न हुई मंडी, गेट नंबर-5 बना तालाब

Dhand News: कैथल के ढांड स्थित विस्तार अनाज मंडी में शनिवार दोपहर हुई हल्की बारिश ने मार्केट कमेटी और स्थानीय प्रशासन की तैयारियों का सच सामने ला दिया। मानसून और मानसूनी फुहारों से निपटने के लिए किए गए तमाम दावे पहली ही बरसात में हवा साबित हुए। मंडी परिसर में देखते ही देखते कई फीट तक पानी भर गया, जिससे वहां मौजूद किसानों, आढ़तियों और पल्लेदार मजदूरों का पैदल चलना तक दूभर हो गया।

गेट नंबर-5 पर सबसे ज्यादा बदहाली, पानी के बीच से गुजरने को मजबूर हुए लोग

मंडी के गेट नंबर-5 पर स्थिति बेहद दयनीय देखने को मिली, जहां बरसाती पानी लबालब भर गया और पूरा रास्ता जलमग्न हो गया। मंडी में अपनी फसल लेकर आने वाले किसानों और व्यापार के सिलसिले में पहुंचे लोगों को इसी गंदे पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ा। सही समय पर निकासी न होने के कारण मंडी में काफी देर तक अफरा-तफरी और अव्यवस्था का माहौल बना रहा, जिससे कामकाज पर भी बुरा असर पड़ा।

“कबाड़ और गाद से भरे पड़े हैं रिचार्ज वेल”, पूर्व प्रधान नरेश सहारण ने साधा निशाना

अनाज मंडी एसोसिएशन के पूर्व प्रधान नरेश सहारण, मास्टर ईश्वर शर्मा, रवि शर्मा, कर्मबीर, खजान सिंह, लाभ सिंह और महेंद्र सिंह ने मार्केट कमेटी की कार्यप्रणाली पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने बताया कि विस्तार अनाज मंडी में जल निकासी के उद्देश्य से जो वाटर रिचार्ज बोर बनाए गए थे, वे लंबे समय से मिट्टी, गाद और प्लास्टिक कचरे से बंद पड़े हैं। व्यापारियों ने आरोप लगाया कि कई बार लिखित और मौखिक गुहार लगाने के बावजूद अधिकारियों ने इनकी सफाई कराने की जहमत नहीं उठाई।

पक्के समाधान की मांग, अनदेखी पर आंदोलन की चेतावनी

व्यापारियों और किसानों का कहना है कि अगर वक्त रहते इन रिचार्ज बोरों की उड़ाही और सफाई करवा दी जाती, तो इस तरह के सामान्य मौसम में मंडी को तालाब बनने से बचाया जा सकता था।

मार्केट कमेटी के जिम्मेदारों की इस बेरुखी का खामियाजा हर बार गरीब मजदूर और अपनी फसल बेचने आए किसान को भुगतना पड़ता है। मंडी प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि आने वाले दिनों को देखते हुए निकासी व्यवस्था को तुरंत दुरुस्त किया जाए, वर्ना उन्हें मजबूरन विरोध का रास्ता अपनाना पड़ेगा।

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