Martyr Sukhchain Singh Sirsa: सिरसा में राजकीय सम्मान के साथ शहीद सुखचैन सिंह का अंतिम संस्कार

सिरसा में राजकीय सम्मान के साथ शहीद सुखचैन सिंह का अंतिम संस्कार
Martyr Sukhchain Singh Sirsa: सिरसा जिले के सीमावर्ती गांव कुत्ताबढ़ के लिए शनिवार का दिन बेहद गमगीन लेकिन असीम गर्व से भरा रहा। जम्मू-कश्मीर के राजौरी सेक्टर में देश की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले लांस नायक सुखचैन सिंह का पार्थिव शरीर जब सेना के विशेष वाहन से उनके पैतृक गांव पहुंचा, तो पूरे इलाके में मातम पसर गया। अपने लाडले को अंतिम विदाई देने के लिए आसपास के दर्जनों गांवों से हजारों लोग उमड़ पड़े।
सुखचैन सिंह का पार्थिव शरीर जैसे ही घर की दहलीज पर उतरा, भारत माता के जयकारों और ‘जब तक सूरज-चांद रहेगा, सुखचैन तेरा नाम रहेगा’ के नारों से पूरा आसमान गूंज उठा।
10 दिन बाद आना था घर, बेटे को था पिता की छुट्टियों का इंतजार
शहीद सुखचैन सिंह के बलिदान की खबर ने परिवार पर दुखों का पहाड़ तोड़ दिया है। परिजनों ने बताया कि सुखचैन को ठीक 10 दिन बाद छुट्टी लेकर घर आना था। उनका 5 साल का मासूम बेटा बेसब्री से अपने पिता के आने की राह देख रहा था ताकि उनके साथ धूमधाम से अपना जन्मदिन मना सके। लेकिन किसे मालूम था कि घर का चिराग छुट्टियों में मुस्कुराता हुआ आने के बजाय तिरंगे में लिपटकर अमर होकर लौटेगा।
पिता की शहादत से पूरी तरह अनजान मासूम बच्चा अपनी मां की गोद में बैठा केवल वहां उमड़ी भीड़ को निहार रहा था। वहीं, शहीद की वीरांगना पत्नी ने आंसुओं को दबाते हुए ‘जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल’ के गगनभेदी नारों के साथ अपने वीर पति को अंतिम विदाई दी। पत्नी का यह अदम्य साहस और देशभक्ति का जज्बा देख श्मशान घाट में मौजूद हर शख्स की आंखें छलक आईं।
सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार, सेना और प्रशासन के अधिकारी रहे मौजूद
गांव के सरकारी श्मशान घाट पर लांस नायक सुखचैन सिंह का अंतिम संस्कार पूरी तरह से राजकीय व सैन्य सम्मान के साथ संपन्न हुआ। भारतीय सेना की टुकड़ी ने हवा में गोलियां दागकर अपने जांबाज साथी को अंतिम सलामी (गॉड ऑफ ऑनर) दी। इसके बाद शहीद के 5 वर्षीय बेटे और छोटे भाई ने अश्रुपूरित आंखों से पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी।
अंतिम संस्कार के मौके पर भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा जिला प्रशासन व पुलिस के आला अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें नमन किया और शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाया। प्रशासन ने सरकार की ओर से शहीद परिवार को हर संभव आर्थिक मदद, सम्मान और सुविधाएं देने का भरोसा दिया।
2015 में पूरा हुआ था देश सेवा का सपना
शहीद सुखचैन सिंह को याद करते हुए सेना के कर्नल इंद्र सिंह, शहीद के चचेरे भाई और ग्रामीणों ने बताया कि वे बचपन से ही बेहद मिलनसार और अनुशासित थे। उन्हें फुटबॉल खेलने का गहरा जुनून था और वे गांव के खेल मैदान में स्थानीय युवाओं के साथ घंटों पसीना बहाया करते थे।
देश सेवा के जज्बे के चलते उन्होंने कड़ी मेहनत की और वर्ष 2015 में भारतीय सेना में भर्ती होकर अपना सपना पूरा किया। लांस नायक सुखचैन सिंह का यह अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान न केवल कुत्ताबढ़ गांव बल्कि पूरे हरियाणा प्रदेश के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।
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