September 16, 2026

बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर Meta का फैसला, यौन शोषण से जुड़े मामलों की भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को रिपोर्ट करेगा

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बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर Meta का फैसला, यौन शोषण से जुड़े मामलों की भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को रिपोर्ट करेगा

बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर Meta का फैसला

Meta Child Safety: टेक कंपनी Meta ने भारत में बच्चों के यौन शोषण और उनकी सुरक्षा से जुड़े अन्य मामलों की जानकारी संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों को देने पर सहमति जताई है। सरकारी सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। यह फैसला केंद्र सरकार और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के बीच हानिकारक कंटेंट को रोकने और बच्चों को ऑनलाइन सुरक्षित रखने को लेकर चल रही बातचीत के बीच सामने आया है।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारत में काम करने वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा जरूरी है। सरकार ने साफ किया है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम खुद नहीं उठाने वाले प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

 

 

सरकार ने प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही बढ़ाने पर जोर दिया

सरकार दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ भी बातचीत कर रही है। इन प्लेटफॉर्म्स से बच्चों से जुड़े हानिकारक कंटेंट की पहचान करने और उसे हटाने के लिए जरूरी व्यवस्था खुद मजबूत करने को कहा जा रहा है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही बढ़ाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। ऑनलाइन इंटरमीडियरीज से खास तौर पर बच्चों को प्रभावित करने वाली हानिकारक सामग्री को फैलने से रोकने के लिए पर्याप्त कदम उठाने को कहा गया है। Meta की ओर से लिया गया फैसला इस दिशा में शुरुआती कदम माना जा रहा है। सरकार के मुताबिक, बच्चों को ऑनलाइन शोषण और हानिकारक सामग्री से बचाने के लिए अभी और काम किए जाने की जरूरत है।

 

 

NCPCR ने Meta अधिकारियों को किया था तलब

इस मामले में 9 सितंबर को Meta India के प्रतिनिधि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के कार्यालय पहुंचे थे। आयोग ने कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और Meta India के प्रमुख को चाइल्ड सेक्सुअल एक्सप्लॉइटेशन एंड एब्यूज मटेरियल (CSEAM) से जुड़े कथित विज्ञापनों की जांच के सिलसिले में तलब किया था।

NCPCR ने 3 जुलाई 2026 को BBC की एक मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया था। रिपोर्ट में Meta के स्वामित्व वाले प्लेटफॉर्म्स पर CSEAM से जुड़े कथित विज्ञापनों का जिक्र किया गया था। इसके बाद आयोग ने Meta Platforms, Inc. को नोटिस जारी कर आरोपों पर जवाब मांगा। Meta ने नोटिस जारी होने के एक सप्ताह बाद आयोग को अपना जवाब सौंप दिया था।

 

 

Instagram पर CSAM के कथित प्रचार की भी जांच

इससे पहले राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने दिल्ली पुलिस को Instagram पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री के कथित प्रचार के आरोपों की व्यापक जांच करने का निर्देश दिया था। आरोप था कि Meta के स्वामित्व वाले Instagram पर पेड विज्ञापनों के जरिए भारत में चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल (CSAM) को बढ़ावा दिया गया।

NHRC ने दिल्ली पुलिस से यह भी जांचने को कहा था कि क्या टेक कंपनी और अन्य संबंधित पक्षों ने प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस (POCSO) एक्ट के तहत अनिवार्य रिपोर्टिंग से जुड़ी जिम्मेदारियों का पालन किया था। सरकार और सोशल मीडिया कंपनियों के बीच चल रही बातचीत का सीधा असर बच्चों से जुड़े हानिकारक कंटेंट की पहचान, रिपोर्टिंग और उसे हटाने की व्यवस्था पर पड़ेगा। Meta की नई सहमति के बाद कानून प्रवर्तन एजेंसियों को ऐसे मामलों में जानकारी मिलने की प्रक्रिया और प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी पर ज्यादा ध्यान रहेगा।

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