Nandi Kanwar Yatra: नंदी की पीठ पर गंगाजल लेकर निकले सिरसा के कांवड़िए, 400 किमी की अनोखी कांवड़ यात्रा बनी चर्चा का विषय
हरिद्वार से नंदी को गंगा स्नान कराकर ला रहे हरियाणा के युवा, पीछे चल रही कार में रखा है वीआईपी चारा
Nandi Kanwar Yatra: सावन के महीने में हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौटने वाले कांवड़ियों के कई रंग देखने को मिलते हैं, लेकिन इस बार हरियाणा की सड़कों पर एक ऐसी कांवड़ यात्रा गुजर रही है जिसे देखकर हर कोई नतमस्तक हो रहा है। सिरसा जिले की कालांवाली मंडी के 9 युवाओं का एक दल गांव की गलियों में घूमने वाले ‘नंदी’ को अपने साथ हरिद्वार ले गया और अब उसकी पीठ पर गंगाजल रखकर पैदल सिरसा लौट रहा है। जहां-जहां से यह ‘नंदी कांवड़’ गुजर रही है, वहां दर्शन करने वालों का हुजूम उमड़ पड़ रहा है।
पिकअप से पहुंचे हरिद्वार, गंगा घाट पर स्नान के बाद शुरू हुई 400 किमी की पैदल यात्रा
कांवड़िए रोशन लाल ने बताया कि वे हर साल हरिद्वार से जल लाते हैं। इस बार सभी साथियों ने फैसला किया कि गांव के मंदिर परिसर में रहने वाले शांत स्वभाव के नंदी को भी पवित्र गंगाजी में स्नान कराया जाए। करीब 10 दिन पहले वे पिकअप गाड़ी में नंदी को बैठाकर हरिद्वार पहुंचे। हर की पौड़ी पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद नंदी को गंगा स्नान कराया गया। इसके बाद नंदी की पीठ पर पवित्र गंगाजल स्थापित कर लगभग 400 किलोमीटर की वापसी पैदल यात्रा शुरू की गई।
नंदी के लिए साथ चल रही लग्जरी कार, आटा-दलिया और स्पेशल डाइट का इंतजाम
इस अनोखी कांवड़ यात्रा में नंदी की सहूलियत का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। नंदी के पीछे-पीछे एक हुंडई वरना कार चल रही है, जिसमें उसके खाने का सामान भरा हुआ है। कांवड़िए अपने साथ 200 किलो आटा, दलिया और हरा चारा लेकर निकले हैं। कैथल पहुंचने तक वे 200 किलोमीटर का सफर तय कर चुके हैं। दोपहर की भीषण गर्मी से बचाने के लिए यात्रा केवल सुबह तड़के और शाम के वक्त की जाती है। दोपहर में किसी भी कांवड़ शिविर में विश्राम किया जाता है, जहां शिविर संचालक भी नंदी की सेवा में जुट जाते हैं।
गांव के मंदिर में रहता है नंदी, शिवरात्रि पर इसी जल से होगा जलाभिषेक
कांवड़ियों का कहना है कि नंदी की समझदारी और शांत स्वभाव के कारण यात्रा में कोई परेशानी नहीं आ रही है। रात को सेवादार खूंटा गाड़कर नंदी को बांधते हैं और उसे भरपेट आटा-दलिया खिलाते हैं। 11 अगस्त को महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर जब यह जत्था गांव पहुंचेगा, तब नंदी की पीठ से उतारे गए गंगाजल से गांव के प्राचीन शिव मंदिर में भोलेनाथ का जलाभिषेक किया जाएगा। इस अनोखे आयोजन को लेकर पूरे कालांवाली क्षेत्र में जबरदस्त उत्साह और भक्ति का माहौल है।
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