Narnaul News: नारनौल की श्री अनाथ गौशाला में गूंजा गोसेवा का संदेश, एक साथ लगी तीन सवामणी, हुआ ऑनलाइन गौदान
नारनौल की श्री अनाथ गौशाला में गूंजा गोसेवा का संदेश, एक साथ लगी तीन सवामणी, हुआ ऑनलाइन गौदान
Narnaul News: सावन के पवित्र महीने में देवाधिदेव महादेव की आराधना के साथ-साथ पुण्य कार्यों का सिलसिला भी परवान चढ़ रहा है। नारनौल की श्री अनाथ गौशाला में इन दिनों गोभक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा है, जहां लगातार गौ सवामणी का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में गुरुवार को गौशाला परिसर में एक साथ तीन हरी चरी और सब्जी की सवामणी के अलावा एक ऑनलाइन गौदान का धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुआ। इस आयोजन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि क्षेत्र के लोगों में मूक प्राणियों की सेवा के प्रति गहरी आस्था और समर्पण भाव है।
अनोखे अंदाज में मनाया जन्मदिन
इस धार्मिक और सामाजिक अनुष्ठान की शुरुआत बेहद खास अंदाज में हुई। शहर के निवासी दिनेश कुमार ने अपनी पत्नी कमलेश देवी के साथ पहुंचकर अपना 60वां जन्मदिन मनाया। जन्मदिन की पारंपरिक पार्टियों से दूर इस दंपती ने गौशाला में पहुंचकर गौमाता को हरी चरी खिलाई और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
इसके तुरंत बाद, दूसरी गौ सवामणी का जिम्मा शहर के प्रतिष्ठित लोगों ने उठाया। इसमें श्री श्याम महायज्ञ आयोजन समिति के प्रधान दौलत राम गर्ग, नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन केदारनाथ गर्ग और प्रमुख समाजसेवी एवं श्याम भक्त पप्पू राम आढ़ती का विशेष सहयोग रहा। वहीं, तीसरी गौ सवामणी एक अन्य गुप्त गोभक्त द्वारा श्रद्धा भाव से अर्पित की गई।
गौदान और सेवा का आध्यात्मिक महत्व
इस पूरे आयोजन के दौरान धार्मिक अनुष्ठानों को आचार्य पुरुषोत्तम कौशिक ने विधि-विधान से पूरा कराया। उनके मार्गदर्शन में रेवाड़ी निवासी कृष्णअवतार की पत्नी पुष्पा देवी ने अपने परिवार के पीड़ा-कष्ट निवारण और मोक्ष प्राप्ति की कामना के साथ ऑनलाइन माध्यम से गौदान किया।
आचार्य जी ने इस मौके पर मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि हिंदू सनातन संस्कृति में गौमाता को भवतारणी और कष्ट निवारणी के रूप में पूजा जाता है। वेदों में भी इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि गाय के शरीर में तैंतीस कोटि देवी-देवताओं का वास होता है।
आचार्य ने आगे बताया कि गौशाला में हरा चारा, ताजी सब्जियां खिलाने और गौदान करने मात्र से बड़े से बड़े और गंभीर कष्टों से मुक्ति मिलने की शक्ति गौमाता के आशीर्वाद में निहित है। सावन के इस पावन महीने में ऐसे आयोजनों से समाज में धर्म और सेवा का एक बेहतरीन संदेश जा रहा है, जिससे युवा पीढ़ी भी अपनी संस्कृति और जीवदया के प्रति प्रेरित हो रही है।
