Narnaul: श्रीमद्भागवत कथा कोई साधारण ग्रंथ नहीं ,बल्कि यह साक्षात भगवान का अक्षर स्वरूप और परमहंसों की संहिता है

Narnaul/Mahendergarh: शहर की प्राचीन श्री रामलीला परिषद के भव्य रंगमंच पर श्री गीता विज्ञान प्रचार समिति महेंद्रगढ़ की ओर से चल रही 7 दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पहले दिन तपोभूमि हरिद्वार से पधारे महामंडलेश्वर श्रीश्री 1008 स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती महाराज के द्वारा मंगलाचरण, पूजन, भागवत कथा का महात्म्य,भक्ति, ज्ञान- वैराग्य, धुंधकारी एवं गोकर्ण कथा का भावपूर्ण वर्णन किया गया।
पहले दिन भागवत कथा के मुख्य यजमान श्री गीता विज्ञान प्रचार समिति के प्रधान मुकेश मेहता, मूलचंद शर्मा, संतलाल दाधीच व पुरूषोत्तम अग्रवाल सपरिवार थे, जबकि सुबह के प्रसाद की व्यवस्था संतलाल दाधीच तथा सायंकालीन कथा के प्रसाद की व्यवस्था आशीष कौशिक की ओर से करवाई गई और पूजन का कार्य आचार्य श्री विनोद तिवाड़ी के द्वारा विधिवत करवाया गया।
कथा महात्म्य का विस्तार से वर्णन करते हुए गुरु जी ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा कोई साधारण ग्रंथ नहीं ,बल्कि यह साक्षात भगवान का अक्षर स्वरूप और परमहंसों की संहिता है। उन्होंने बताया कि भागवत कथा सुनने से मनुष्य के मन से मृत्यु का भय और अज्ञान दूर होता है तथा हृदय में भगवान के प्रति भक्ति और अनुराग उत्पन्न होता है। इस अवसर पर श्री गीता विज्ञान प्रचार समिति के सदस्यों के अतिरिक्त सैंकड़ों की संख्या में स्त्री पुरुष और बच्चे भी मौजूद रहे।
