Badli Balidan Diwas: बादली बलिदान दिवस को लेकर नीलोखेड़ी में जनसंपर्क तेज, फतेह सिंह निडाना ने दिग्गजों को दिया न्यौता
2 अगस्त को अहर–कुराना–छिछड़ाना चौक पर जुटेगा समाज,
Badli Balidan Diwasनीलोखेड़ी (महाबीर मैहला) हरियाणा की माटी के वीर जांबाजों और पूर्वजों के अप्रतिम त्याग को नमन करने के लिए हर साल आयोजित होने वाला ‘बादली बलिदान दिवस’ इस बार बेहद अनूठे और भव्य रूप में सामने आने वाला है। आगामी 2 अगस्त 2026 को अहर–कुराना–छिछड़ाना चौक पर होने वाले इस महा-समारोह को लेकर तैयारियां युद्ध स्तर पर जारी हैं। आयोजन में समाज के हर वर्ग और खासकर युवाओं की रिकॉर्ड तोड़ भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए बादली बलिदान दिवस समिति के पदाधिकारियों ने दिन-रात एक कर रखा है। गांवों की चौपालों से लेकर शहर के रसूखदार चेहरों के कमरों तक, इस वक्त सिर्फ पूर्वजों के शौर्य को नमन करने और एकजुटता दिखाने की अपील गूंज रही है।
नीलोखेड़ी में दिग्गजों से मिले समिति के पदाधिकारी, मिला पूरा समर्थन
इसी जनसंपर्क अभियान के सिलसिले में नीलोखेड़ी पहुंचे बादली बलिदान दिवस समिति की कोर कमेटी के वरिष्ठ सदस्य फतेह सिंह निडाना (पुंडरी) ने क्षेत्र के कई कद्दावर सामाजिक प्रतिनिधियों से व्यक्तिगत मुलाकात की। उन्होंने पूर्व ब्लॉक समिति चेयरमैन चौधरी फूल सिंह मंजूरा, प्रमुख सामाजिक नेता चेयरमैन सतीश बतान, सरपंच एसोसिएशन के प्रधान व शाहपुर के मौजूदा सरपंच चंद्रभान, सुनील कुमार (चोरकारसा) और बलवान सिंह चोपड़ा (निडाना) को समारोह का औपचारिक निमंत्रण पत्र सौंपा और उनसे सपरिवार पहुंचने का विशेष आग्रह किया।
मुलाकात के दौरान क्षेत्र के इन तमाम गणमान्य लोगों ने समिति की इस मुहिम की खुलकर तारीफ की। नेताओं का कहना था कि अपने इतिहास और पूर्वजों के बलिदान को भूलने वाले समाज कभी तरक्की नहीं कर सकते। आज के उपभोक्तावादी दौर में युवाओं को यह बताना बेहद जरूरी है कि जिस आजादी और सम्मान की हवा में वे सांस ले रहे हैं, उसकी कीमत हमारे पुरखों ने अपना खून बहाकर चुकाई है।
नई पीढ़ी को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का मिशन
समारोह समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि 2 अगस्त का यह आयोजन महज एक औपचारिक जलसा नहीं है, बल्कि यह हमारी आने वाली पीढ़ी को अपनी जड़ों, सांस्कृतिक विरासत और समाज की एकजुटता से जोड़ने का एक जीवंत माध्यम है। जिस तरह से गांवों में इस कार्यक्रम को लेकर उत्साह देखा जा रहा है, उससे साफ है कि इस बार अहर–कुराना–छिछड़ाना चौक पर उमड़ने वाली भीड़ पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ देगी। समिति ने एक बार फिर खुले मंच से सभी समाज बंधुओं से अपील की है कि वे इस दिन वैचारिक मतभेदों को भुलाकर एक जाजम पर आएं, अपने वीर पूर्वजों को श्रद्धासुमन अर्पित करें और इस आयोजन को इतिहास के पन्नों में दर्ज कराने के लिए अपना योगदान दें।
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