Panipat Park Hospital: पानीपत पार्क अस्पताल ने मानी अपनी गलती, कंसेंट फॉर्म पर स्टाफ ने खुद किए थे फर्जी साइन
पार्क अस्पताल में महिला की मौत पर बढ़ा विवाद
Panipat Park Hospital: पानीपत शहर के बहुचर्चित पार्क अस्पताल में पैर की हड्डी का इलाज कराने आई महिला मरीज गुड्डी देवी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में सोमवार को अस्पताल प्रशासन ने अपनी चुप्पी तोड़ी। मीडिया के सामने आकर अस्पताल की सीईओ (CEO) सपना ने मामले पर अपनी सफाई पेश की। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने प्रशासनिक स्तर पर हुई गलतियों को सार्वजनिक तौर पर स्वीकार किया, लेकिन साथ ही मृतक महिला के परिजनों पर गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर को नियम विरुद्ध और गैर-कानूनी करार दिया।
अस्पताल प्रबंधन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में माना कि उनके स्टाफ से इस पूरे घटनाक्रम में भारी चूक हुई है। सीईओ ने स्वीकार किया कि मरीज के ऑपरेशन से जुड़े सहमति (कंसेंट) फॉर्म के हस्ताक्षर वाले कॉलम में अस्पताल के ही स्टाफ सदस्यों ने खुद मरीज के परिजनों का नाम लिख दिया था। उन्होंने माना कि यह प्रशासनिक स्तर पर स्टाफ की एक बहुत बड़ी गलती थी और इसके लिए जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय स्तर पर कदम उठाए जा रहे हैं।
पहले इनकार, फिर फोन पर मिली सहमति का दावा
अस्पताल प्रबंधन ने अपना पक्ष रखते हुए दावा किया कि जब परिजनों को मरीज की हृदय संबंधी गंभीर समस्या और दिल में छल्ला (स्टेंट) डालने की जरूरत के बारे में बताया गया था, तो शुरुआत में उन्होंने इसके लिए साफ मना कर दिया था। हालांकि, जब डॉक्टरों ने मरीज की नाजुक स्थिति और बीमारी की गंभीरता के बारे में दोबारा विस्तार से समझाया, तो परिजनों का रुख बदला। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, उन्होंने आखिरकार महिला के बेटे से फोन पर सीधी बातचीत की और उसकी मौखिक सहमति मिलने के बाद ही दिल में स्टेंट डालने की प्रक्रिया शुरू की गई थी।
परिजनों पर पैसों के लेनदेन का आरोप, एफआईआर रद्द करने की मांग
दूसरी तरफ, पीड़ित परिवार पर तीखा हमला बोलते हुए अस्पताल प्रबंधन ने उन पर ब्लैकमेलिंग और पैसों की नाजायज मांग करने का आरोप मढ़ा है। प्रबंधन का कहना है कि महिला की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल से मोटी रकम की मांग की थी, जिसे पूरा करने से मना करने पर उन्होंने हंगामा खड़ा कर दिया और पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी।
अस्पताल प्रशासन ने पुलिस कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पुलिस अधीक्षक (SP) भूपेंद्र सिंह के नाम एक पत्र भेजा है, जिसमें दर्ज एफआईआर को तुरंत निरस्त करने की मांग की गई है। अस्पताल का तर्क है कि सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) और मेडिकल काउंसिल के दिशानिर्देशों के तहत, किसी भी डॉक्टर या अस्पताल के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने से पहले एक स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड द्वारा प्राथमिक जांच कराया जाना अनिवार्य है। अस्पताल ने आरोप लगाया कि पानीपत पुलिस ने बिना किसी मेडिकल बोर्ड की जांच रिपोर्ट का इंतजार किए जल्दबाजी में केस दर्ज किया है, जो पूरी तरह से नियम विरुद्ध है।
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